काला बंदर सामान्य बंदर (रीसस मकाक) देखने में थोड़े अलग हैं। आकार और संरचना में यह असम रीसस से थोड़ा मिलता है। इसकी जबड़े की बनावट असम रीसस से थोड़ी अलग है। काला बंदर मध्यम आकार, भूरे सुनहरे रंग, ऊपरी और निचला भाग चॉकलेटी रंग का है। पूरे शरीर पर सफेद फर है।
इनका जबड़ा हल्का बाहर की ओर निकला है। नर के चेहरे का रंग गहरा और आंखों के चारों ओर हल्का है। मादा की आंखों के चारों ओर लाल रंग का घेरा बना है। मुंह और नाक के चारों ओर गुलाबी रंग की त्वचा होती है।
इनकी पीठ पर छोटा सा कूबड़ निकला है। कान तिकोने व बाल रहित हैं। इनकी पूंछ की लंबाई शारीर के एक तीन चौथाई है। इनका मुख्य भोजन च्यूरा, गरुड़, केन व पियूली के पत्ते हैं। गोरी घाटी में ये बंदर 700 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर रहते हैं। काला बंदर सामान्य बंदरों से अलग सीधे, सरल और गंभीर स्वभाव के होते हैं।
गोरी घाटी में काला बंदरों की सीमित संख्या देखी गई है। सामान्य बंदरों से यह बंदर अलग दिख रहे हैं। यह बंदर लुप्त प्राय हैं। बंदरों को बचाने के लिए वैज्ञानिक आनुवांशिक अनुसंधान के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।
-संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान उत्तराखंड