किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग के साथ दुराचार का आरोप साबित होने पर एक किशोर को तीन वर्ष के लिए सुधार गृह भेजने के आदेश दिए हैं। इस प्रकरण में बोर्ड ने चार्जशीट दाखिल होने के दो माह के अंदर फैसला सुनाया है।
जिला सहायक अभियोजन अधिकारी सुदर्शन चौधरी ने बताया कि 17 मई 2013 को पीड़िता के पिता ने शिकायत की थी कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री के साथ गांव के एक लड़के ने गोशाला में बलात्कार किया। उसकी बेटी के रोने-चीखने की आवाज सुन कर गाँव के तीन लोगों ने उसे छुड़ाया। आरोपी ने इस घटना का किसी से जिक्र करने पर मारने की धमकी दी।
12 गवाह पेश
पीड़िता के पिता की तहरीर पर आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 376 और 506 में मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के उपरांत विवेचक ने 376 व 506 आईपीसी और 3/4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में आरोप पत्र न्यायालय में भेजे। अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए।
आरोपी की प्रवृति अपराधी नहीं
बोर्ड की अध्यक्ष सविता चमोली और सदस्य सुशीला बिष्ट ने किशोर न्याय अधिनियम 2000 के तहत आदेश पारित करने से पूर्व जिला परिवीक्षा अधिकारी से आरोपी की सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी अपराधी प्रवृत्ति का नहीं है। लेकिन बोर्ड ने आरोपी द्वारा किए गए लैंगिक अपराध को देखते हुए उसके व्यवहार में सुधार की आवश्यकता बताई। ताकि वह भविष्य में अपराध की पुनरावृत्ति न करे। बोर्ड ने आरोपी को 506 के आरोप से मुक्त कर दिया।