शासन ने पुलिस मुख्यालय के 66 रैंकर दारोगाओं को 2001 की वरिष्ठता दिए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। प्रमुख सचिव गृह उमाकांत पंवार ने निर्धारण संबंधी प्रस्ताव मूल पत्रावली के साथ तलब किया है। सीधी भर्ती के दारोगाओं में इस आदेश को लेकर आक्रोश था। उन्होंने डीजीपी के अलावा शासन में प्रत्यावेदन देकर अपना विरोध जताया था। इस आदेश से जहां दारोगाओं के चेहरे खिले है, वहीं रैंकर दारोगाओं को झटका लगा है।
बीएस सिद्धू ने दी थी वरिष्ठता
पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने 2008 में ट्रेनिंग लेकर आए प्रदेश के 66 रैंकर दारोगाओं को 21 मार्च 2016 को 2001 की वरिष्ठता प्रदान कर दी थी। सीधी भर्ती के दारोगा पहले दिन से ही वरिष्ठता प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे। उनका कहना था कि रैंकर परीक्षा उत्तर प्रदेश सरकार ने कराई थी।
यूपी में 1268 रैंकर दारोगाओं की वरिष्ठता का अभी तक निर्धारण नहीं हुआ। इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए साक्षात्कार की तिथि घोषित करने के बाद वरिष्ठता का यह निर्धारण किसी भी नजरिये से न्यायोचित नहीं है। हालांकि पुलिस मुख्यालय अपने आदेश को सही ठहरा रहा था।
रैंकर दारोगाओं ने वरिष्ठता के आदेश को अपना हक बताया था। सीधी भर्ती के दारोगाओं ने शासन को प्रत्यावेदन देकर वरिष्ठता निर्धारण को कई बिदुंओं पर चुनौती दी थी। उन्होंने उसके पक्ष में साक्ष्य और तर्क भी दिए गए थे।
सीधी भर्ती दारोगाओं में खुशी
प्रमुख सचिव गृह उमाकांत पंवार ने 21 मार्च के वरिष्ठता निर्धारण के आदेश को निरस्त कर दिया है। डीजीपी को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि प्रत्यावेदन पर विचार कर यह निर्णय निरस्त किया गया है। प्रस्ताव को मूल पत्रावली के साथ अविलंब शासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
वरिष्ठता का आदेश निरस्त होने पर सीधी भर्ती के दारोगाओं ने खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि आदेश नियमों के विरुद्ध था। बता दें कि दारोगाओं को प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाने के इंटरव्यू के लिए पांच अप्रैल से लेकर सात अप्रैल की तिथि पहले से घोषित है।