दिनभर ‘राजपाट’ करने वाले अधिकारी-कर्मचारी रात में राम भक्ति में लीन होकर रामायण के किरदार को जीते हैं। दफ्तर में पूरे दिन हिंदी और अंग्रेजी में कलम चलाने वाले रात में अवधि में संवाद बोलकर दर्शकों की वाहवाही लूटते हैं। यह कहानी है पर्वतीय रामलीला कमेटी में अभिनय करने वाले कलाकारों की जो प्रदेश की विधानसभा और सचिवालय में कार्यरत हैं। इनमें से कुछ 10वीं और 12वीं के छात्र भी हैं जो स्कूल की छुट्टी के बाद रिहर्सल कर शाम को अभिनय करने मंच पर आते हैं।
कमेटी के संरक्षक रोहित मित्तल ने बताया कि उनके नाना रवि मित्तल ने दस साल पहले रामलीला मंचन की योजना बनाई थी, लेकिन अगले ही वर्ष उनका स्वर्गवास हो गया, जिसके बाद यह जिम्मा रोहित की मां ने संभाला और रामलीला का मंचन शुरू कराया। कलाकारों की तलाश में जब कमेटी निकली तो रेसकोर्स में रहने वाले सचिवालय और विधानसभा के कार्मिकों ने इसके लिए हामी भर दी। 10 साल से यह रामलीला नियमित होती आ रही है। यहां हर साल ज्यादातर कलाकार बदल जाते हैं। इसका करण है कि कभी किसी का ट्रांसफर हो जाता है तो कोई सेवानिवृत्त होकर अपने घर चला जाता है। अभिनय करने वाले छात्र भी पढ़ाई के लिए इधर-उधर चले जाते हैं। मित्तल ने बताया कि सचिवालय के कई कर्मचारी रामलीला कमेटी और कलाकार मंडली में शामिल हैं।
ये हैं कलाकार
राम - नकुल बुढानी - सचिवालय में कार्यरत हैं।
लक्ष्मण - पंकज सती - 11वीं के छात्र हैं।
दशरथ - कैलाश पांडे - सचिवालय में अनुभाग अधिकारी हैं।
परशुराम - शेखर जोशी - सूचना विभाग में कार्यरत हैं।
रावण - संदीप ढैला - विधानसभा में कार्यरत हैं।
जनक - कैलाश पाठक - एलआईसी में कार्यरत हैं।
सीता - अंकित बुड़ाकोटी - कोचिंग करते हैं।
भरत - नितेश राव - 12वीं के छात्र हैं।
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