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इंदिरा-संजय जैसा हश्र चाहते हैं रामदेव

Wed, 02 Apr 2014 04:41 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में मां-बेटे इंदिरा और संजय गांधी का जो हश्र हुआ था, सोनिया और राहुल का वही हश्र बाबा रामदेव इस चुनाव में देखना चाहते हैं।
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तीन वर्ष पहले दिल पर लगी चोट के बाद बाबा ने तय कर लिया था कि अगली संसद से मां-बेटे को हर सूरत में बाहर रखना है। योजनाबद्ध ढंग से काम करते हुए बाबा मोदी के साथ खड़े हुए और दोनों एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं।

गौरतलब है कि बाबा रामदेव भाजपा के सवा रुपये वाले सदस्य भी नहीं हैं। बावजूद इसके बाबा से जुड़े उच्चस्थ सूत्रों की मानें तो बाबा पांच राज्यों में भाजपा से कुल मिलाकर 32 टिकट ले उड़े हैं।
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बाबा की मंशा तो कुछ और ही है

बाबा शुरू से ही चाहते थे कि उमा भारती रायबरेली से सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ें। इसलिए उन्होंने मोदी से मिलकर हरिद्वार से लड़ने की इच्छुक उमा भारती को उत्तराखंड प्रदेश का प्रभारी बनाया और पहले निशंक का नाम यहां से तय करवा दिया।

उमा से पहले बाबा रामदेव ने हेमा मालिनी को सोनिया के खिलाफ लड़ाने का प्रयास किया था। हेमा इसके लिए राजी नहीं हुई। मोदी की बेहद करीबी स्मृति ईरानी का नाम भी बाबा की पहल पर तय किया गया था। मनोज तिवारी का नाम भी बाबा ने तय कराया।

बाबा रामदेव खुले रूप में तो नहीं अपितु पर्दे के पीछे यह मानने से इंकार नहीं करते कि उन्होंने समर्थन के बदले भाजपा से 32 टिकट लिए हैं। बाबा की मंशा है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक बड़ी शक्ति उनके हाथ में भी बनी रहे। इस मकसद में उन्हें कामयाबी मिलती भी दिखाई दे रही है।

'मोदी को छिपकर समर्थन नहीं दिया'

नरेंद्र मोदी ही ऐसे एकमात्र नेता हैं जो सोनिया के भ्रष्ट दरबारियों को बाहर रख सकते हैं। मैं चाहता हूं कि जनता सोनिया और राहुल को भारी मतों से हराएं। दोनों ने देश की जनता के साथ गद्दारी की है। मोदी भाजपा के प्रत्याशी हैं और उन्होंने मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए खुलेआम समर्थन दिया है। जहां तक प्रत्याशियों का सवाल है, उन्होंने केवल सुझाव दिए हैं।
-योग गुरु बाबा रामदेव
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आखिरी निर्णय भाजपा का था

यह ठीक है कि कुछ प्रत्याशियों को लेकर आग्रह किया गया था। हम कदापि नहीं चाहते थे सोनिया और राहुल इस बार जीतें। फलस्वरूप दोनों के खिलाफ उमा भारती सहित दमदार प्रत्याशियों को लड़ाने के सुझाव दिए गए थे। अब यदि उमा नहीं लड़ना चाहती अथवा भाजपा किसी और को उतारती है तो यह उसका निर्णय है। भाजपा के प्रति हमारे सभी प्रतिष्ठानों और स्वाभिमान आंदोलन का रुख किसी से छिपा नहीं हैं।
-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ
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