फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘पुत्रजीवक बीज’ दवा पर रामदेव को मिली बड़ी राहत

Sat, 30 May 2015 10:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी की दवा दिव्य पुत्रजीवक बीज और पुत्रजीवक शिवलिंगी सीड की जांच रिपोर्ट में नाम और गुणवत्ता के निर्धारित मानकों में कोई खामी नहीं मिली है। जांच के निर्धारित बिंदुओं से अलग लाइसेंस से संबंधित कुछ खामियां सामने आई हैं।
विज्ञापन


पुत्रजीवक बीज दवा के नाम से कंपनी को लाइसेंस मिला है लेकिन कंपनी ने दिव्य शब्द बिना अनुमति के जोड़ दिया। दवा 200 ग्राम के पैक में बनाकर बेचने की अनुमति है, जबकि अलग-अलग मात्रा की पैकिंग बाजार में उपलब्ध है।

राज्य सरकार ने केंद्रीय आयुष मंत्रालय के निर्देश पर 16 मई को दिव्य फार्मेसी की दो दवाओं की जांच के लिए समिति गठित की थी। शासन ने राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी आयुष विभाग की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें सहायक औषधि नियंत्रक आयुष विभाग और जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी हरिद्वार सदस्य हैं।
विज्ञापन


समिति को दवाओं की गुणवत्ता, उत्पादकता व लाइसेंस के संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट साक्ष्यों सहित उपलब्ध करनी थी। डेढ़ सप्ताह में आई जांच रिपोर्ट में दवा गुणवत्ता और जांच के तय मानकों पर खरी उतरी है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है।
विज्ञापन

आयुर्वेद के आधार पर है पुत्रजीवक बीज नाम

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पुत्रजीवक बीज दवा का आयुर्वेद में यही नाम है और उसका विस्तृत उल्लेख है। यह नि:संतान दंपतियों के लिए कारगर है।

बता दें कि जनता दल (यू) के राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने संसद में दवा के नाम पर आपत्ति उठाई थी। दवा को पुत्र पैदा करने का इलाज बताकर बेचे जाने का आरोप भी दिव्य फार्मेसी पर लगा है। ऐसे में रिपोर्ट के बाद दवा से जुड़े पुत्र शब्द पर विवाद को विराम लगेगा।

यह मामले भी नहीं बनते
केंद्र ने ड्रग्स एवं कास्मेटिक एक्ट 1940 एवं ड्रग्स एवं मैजिक रैमिडिज (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट 1954 के तहत पीएनडीटी (लिंग चयन पर प्रतिबंध) एक्ट 1954 के उल्लंघन के तहत जांच करवाई। इन सभी एक्ट के अनुरूप रिपोर्ट में दवा को सही पाया गया है।

खामियां भी मिलीं
दिव्य फार्मेसी ने 2009 में पुत्रजीवक बीज के नाम पर आयुष विभाग से लाइसेंस लिया था। 2014 तक इसी नाम से दवा बाजार में आती रही, इसके बाद नाम के आगे फार्मेसी ने दिव्य शब्द जोड़ दिया। लेकिन उसका संशोधन जारी लाइसेंस में नहीं हुआ। वहीं, दवा की पैकिंग 200 ग्राम की तय गई है, जिसे अलग-अलग मात्रा की पैकिंग में बेचा जा रहा है। इन त्रुटियों को सुधारने के लिए फार्मेसी को नोटिस भी दिया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें