नरेंद्र मोदी के लिये बाबा रामदेव सितंबर 2013 से ही प्रतिज्ञा करके हरिद्वार से बाहर हैं।
दरअसल राहुल गांधी को नीचा दिखाने के लिए बाबा ने इस दर्जे का बयान दे दिया कि देश का पूरा दलित समाज उनके खिलाफ हो गया। इससे मोदी को खतरा हो सकता है।
दलितों के बल पर भाजपा दिल्ली की कुर्सी हासिल करने का स्वप्न जोह रही थी। ऐसे में भाजपाई भी उनसे कतराने लगे। योग शिविरों के माध्यम से मोदी का जबरदस्त प्रचार करने वाले बाबा को कई बार सत्ताधीशों की फटकार भी झेलनी पड़ी।
चुनाव आयोग को डांट लगायी। बचते-बचाते बाबा मोदी का बढ़िया काम कर रहे थे कि उनके बड़बोलेपन ने मोदी का खेल बिगाड़ दिया।
रामदेव ने ही बताया था प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार
बाबा रामदेव ने ही पहली बार मोदी को पतंजलि बुलाकर उन्हें भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया था।
भाजपा ने भी जब मोदी के नाम पर मुहर लगाई तो बाबा की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच गईं। बाबा मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश भर में घूमने लगे।
उनके शिविरों में योग के अलावा मोदी के पक्ष में माहौल बनाने का भी काम किया जाता था। लेकिन चुनाव आते-आते बाबा से कुछ ऐसी बदजुबानी हुई कि मोदी और भाजपा भी सफाई देते नजर आए।
बनारस में भी बाबा प्रचार के लिए नहीं जा पा रहे। जिस शख्स को उन्होंने ही प्रोजेक्ट किया आखिर में उसी के काम नहीं आ सके।
बनारस में न कर पाए प्रचार
दलित समाज को वापस लाने के लिए भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ खुद मोदी को भी खासी कसरत करनी पड़ी।
स्वामी रामदेव ने मोदी के प्रचार के लिए करीब एक लाख किमी की यात्रा की। उन्होंने 300 से अधिक शिविर लगाए।
संयोग देखिए कि बाबा बनारस ही न जा पाये। बाबा को बनारस में तीन मई से शिविर लगाना था, जिसकी अनुमति उनके बयान के बाद रद्द कर दी गयी।
अनेक कोशिशें करते रहे पर बाबा को बनारस तो क्या आसपास के जनपदों में शिविर लगाने की इजाजत भी न मिली।
मेरी नीतियां मोदी सरकार बताएगी
योगगुरु स्वामी रामदेव का कहना है कि हमारा एजेंडा भ्रष्टाचार के खिलाफ था और आज भी है। मोदी को समर्थन इसी आधार पर दिया गया था कि वे कालेधन को वापस लाएंगे।
चूंकि अधिकांश कालाधन कांग्रेस से जुड़े नेताओं का है, अत: नई सरकार आने से कांग्रेस की बेचैनी स्वाभाविक है। हमने अपना 10 सूत्रीय मांग पत्र भाजपा को दे दिया था और हमें सहमति पत्र भी मिल गया।
मेरी नीतियां क्या हैं, यह बात अब मोदी सरकार स्वयं बताएगी।
18 को दिल्ली में जश्न, 20 को वापसी
हमारा स्वप्न पूरा होने में कोई देर नहीं है। सचमुच अच्छे दिन आने वाले हैं। मोदी सरकार बनने पर योग का अभियान निश्चित रूप से कईं गुना गति पकड़ेगा।
हमारे विश्वव्यापी अभियानों पर कांग्रेस का ग्रहण लग गया था। 16 मई को मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
18 मई को बाबा दिल्ली में बड़ी सभा का आयोजन कर रहे हैं। वनवास से उनकी वापसी 20 मई को पतंजलि योगपीठ में होगी।
- आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ