चेकडैम बनाने जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे हैं
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रामचंद वीरवानी ने कभी राज्यसभा के निदेशक जैसे बड़े पद को सुशोभित किया और आज दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में दिनभर मजदूरों के साथ खड़े होकर अपने खर्च से चाल-खाल (खाव) और चेकडैम बनाने जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे हैं। पहाड़ों से सीधा संबंध न होने के बावजूद दिल्ली से आकर जल, जंगल और जमीन को बचाने की ऐसी पहल पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनके गहरे लगाव का ही द्योतक है।
दिल्ली के द्वारिका निवासी रामचंद वीरवानी राज्यसभा के निदेशक पद से दिसंबर 2011 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने पिछले चार सालों में द्वाराहाट विकास खंड के नट्टागुल्ली, बिठोली, दूनागिरी, कांडे और नागार्जुन में अपने खर्च पर अब तक करीब पचास खाल और कुछ चेकडैम बनवाए हैं। वे किसी संस्था और व्यक्ति को धनराशि देने के बजाय अपने हाथ से सीधे मजदूरों को भुगतान करते हैं। दिनभर अपनी निगरानी में खाल बनवाते हैं और प्रतिदिन शाम को भुगतान करते हैं।
वीरवानी की सोच देखिए, कहते हैं- देश ने उन्हें बड़ा पद नाम और अच्छी पेंशन दी है। ऐसे में देश को कुछ लौटाने का उनका भी फर्ज बनता है। देश के लिए उनकी पीड़ा और चिंता उन्हें पर्यावरण संरक्षण की ओर खींच लाई है।