बिजली, बैटरी और लोहे का नहीं हुआ इस्तेमाल
राम नवमी की तारीख चंद्र कैलेंडर से निर्धारित होती है इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि शुभ अभिषेक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो, 19 गियर की विशेष व्यवस्था की गई है। डॉ. चौहान का कहना है कि, गियर-बेस्ड सूर्य तिलक मैकेनिज्म में बिजली, बैटरी या लोहे का उपयोग नहीं किया गया है।
आईआईए ने चंद्र और सौर कैलेंडर का निकाला था समाधान
एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में भारत के प्रमुख संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) ने चंद्र और सौर (ग्रेग्रेरियन) कैलेंडरों के बीच जटिलतापूर्ण अंतर के कारण आने वाली समस्या का समाधान किया है। इसके बाद इस मैकेनिज्म को तैयार और सही जगह पर रखने में आसानी हुई।
19 साल के रिपीट साइकल से हल हुई समस्या
डॉ. चौहान बताते हैं कि यह एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रयोग था। इसमें दो कैलेंडरों के 19 साल के रिपीट साइकल ने समस्या को हल करने में मदद की। राम मंदिर की तरह ही सूर्य तिलक मैकेनिज्म का उपयोग पहले से ही कोणार्क के सूर्य मंदिर और कुछ जैन मंदिरों में किया जा रहा है। हालांकि उनमें अलग तरह की इंजीनियरिंग का प्रयोग किया गया है। राम मंदिर में लगा मैकेनिज्म पहली बार इस तरह का प्रयोग है।
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राम नवमी के दिन सूर्य तिलक को लेकर सभी को बेसब्री से इंतजार था। पूरा भारत देश इस दिन का इंतजार कर रहा था। राम मंदिर पूरा होने के बाद सूर्य तिलक मैकेनिज्म शुरू हो गया था। करीब चार मिनट के लिए सूर्य तिलक का समय है।
- डॉ. प्रदीप चौहान, वैज्ञानिक, सीबीआरआई