1980 से लेकर 1996 तक हुईं कई बैठकें
मुझे राम जन्म भूमि न्यास क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया। मेरा विशेष आमंत्रण पत्र में न्यासी की लिस्ट में ऊपर से छठवें नंबर पर नाम है। इससे उतनी खुशी नहीं है जितना बलिदानी कारसेवकों के परिवारों को मिले न्याय से मिली है। यह पांच सौ वर्षों का संघर्ष है जो सेवकों के बलिदान को मिली सफलता के रूप में सामने है। धर्मनगरी हरिद्वार की भूमिका इस तरह महत्वपूर्ण रही कि यहां पर 1980 से लेकर 1996 तक कितनी ही बैठकें, धर्मसभाएं हुईं।
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मुझे संघर्ष का दौर याद आता है जब हरिद्वार के रानी गली में अखंड परमधाम का नाम लेते ही कारसेवक समझकर आम श्रद्धालु को भी गिरफ्तार कर लिया जाता था। प्रतिबंध लगने के बाद शिष्या साध्वी ऋतंभरा और विहिप के तमाम अपरिचित कार्यकर्ता इस आश्रम में सेवक बनकर कार्य करते थे। यही नहीं आज शीर्ष पदों पर आसीन कई कारसेवकों ने तो यहां गोशाला तक में सेवा दी। आज भी उसी परंपरा को जीवंत रखते हुए मथुरा और काशी के मुद्दे को धार देने की आवश्यकता है। निरंजनी अखाड़े ने अब तक इस आश्रम से 25 मंडलेश्वर को दीक्षा दी। तीन दिन पूर्व अयोध्या पहुंचकर उन स्थलों को नमन करना है जहां वीरों ने राम सेवक बनकर बलिदान दिया। ( युग पुरुष स्वामी परमानंद, परमाध्यक्ष, अखंड परमधाम)