संजय बताते हैं कि केवल उनके पिता ने अयोध्या जाने के लिए प्रेरित किया। सगे संबंधियों ने कैरियर खराब होने का डर दिखाया। सब कुछ भगवान राम पर छोड़कर साथी राजेश सैनी समेत काफी संख्या में युवक अयोध्या जाने को राजी हो गए।
24 अक्तूबर 1990 को कनखल झंडा चौक से रामभक्त अयोध्या के लिए निकल पड़े थे। हरकी पौड़ी से अपर रोड होते हुए जब लालतारौ पुल पहुंचे तो पहले से तैयार पुलिस ने रामभक्तों को लाठीचार्ज कर तितर बितर कर दिया। हम दोनों के साथ कनखल के दो समाजसेवियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
देर रात रुड़की जेल भेज दिया गया। संजय बताते है कि उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। राजेश की तो तबीयत बिगड़ गई। खैर पांच नवंबर 1990 को उनकी रिहाई हुई। संजय और राजेश का कहना है कि इतने बरस बाद राम मंदिर के भूमि पूजन की ख़ुशी है।