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हरिद्वार: राम मंदिर; अयोध्या के संतों को पांच कार्यक्षेत्रों में मिलेगा पूर्ण अधिकार, नई धार्मिक समिति गठित

Thu, 17 Sep 2026 02:00 PM IST
Renu Saklani कृष्णकांत मणि त्रिपाठी, माई सिटी रिपोर्टर, हरिद्वार

सार

रामलला की नगरी अयोध्या में अब मंदिर की व्यवस्थाओं और धार्मिक परंपराओं में स्थानीय संतों की भूमिका और बढ़ने जा रही है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नई धार्मिक समिति का गठन कर अयोध्या के पांच प्रमुख संतों को अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से मिलते श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज । - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राम मंदिर में अब सेवा और परंपरा के नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए अयोध्या के संतों को जोड़ते हुए एक नई धार्मिक समिति का गठन किया है। इस समिति में अयोध्या के पांच प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत भी शामिल हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि राम मंदिर अब सिर्फ निर्माण नहीं, सेवा और परंपरा के नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है, जिसमें अयोध्या के संतों की भूमिका सबसे अहम होगी।

बुधवार को ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव व संत स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज हरिद्वार के कनखल स्थित आश्रम में पहुंचे। उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से आशीर्वाद लिया और अयोध्या में किए जा रहे विकास कार्य से लेकर परिवर्तन और कई व्यवस्थाओं में नवाचार को लेकर चर्चा की।

अमर उजाला से विशेष बातचीत में स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि अब तक अयोध्या और वहां के निवासियों के रामलला पर अधिकार को लेकर अनदेखी हुई। अब रामलला के प्रिय अयोध्यावासियों और वहां के संतों को पूर्ण सहभागिता के साथ जिम्मेदारी दी जा रही है।

स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि कुल पांच कार्यक्षेत्र हैं जिन पर अयोध्यावासियों का पूर्ण अधिकार है, वह निर्णय लेंगे। नव गठित समिति में भगवान की सेवा-पूजा की पद्धति और मंदिर के सभी उत्सवों की तिथि व स्वरूप का निर्धारण सदस्यों की कार्यकारिणी करेगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में जन्माष्टमी पर पहली बार रात्रि में श्री कृष्ण झूला उत्सव का आयोजन किया गया।

मंदिर परिसर के यज्ञ स्थल में प्रतिदिन पंच देवता यज्ञ विधिवत शुरू हो गया है। सुबह की शृंगार आरती को भी अधिक व्यवस्थित और नए स्वरूप में किया गया है। वैष्णव परंपरा के अनुसार मंदिर में प्रतिदिन संत पदगान (भजन-कीर्तन) कर रहे हैं। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि शृंगार आरती से शयन आरती तक एक स्थल चिह्नित कर श्री राम जय राम जय जय राम विजय मंत्र का अखंड संकीर्तन भी जल्द शुरू होगा।

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डिजिटल युग में पारदर्शिता काफी आसान

स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि डिजिटल युग में पारदर्शिता काफी आसान है। उन्होंने कहा कि पिछले कई बार से नई गठित समिति के सदस्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की जा चुकी है। अब प्रत्येक सदस्य का वॉट्सएप ग्रुप है, इसमें सभी को पूरी स्वतंत्रता के साथ अपनी बात रखने का अधिकार दिया गया है। स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि जल्द ही प्रत्येक शीर्ष पदाधिकारी कैमरों को अपने मोबाइल पर देखेगा और उससे हर कोई निगरानी करेगा।

अयोध्या की सीता रसोई अब मां सीता अन्न क्षेत्र के नाम से जानी जाएगी

जन्माष्टमी पर पहली बार रात्रि में श्री कृष्ण झूला उत्सव का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर में प्रतिदिन पंच देवता यज्ञ शुरू किया गया है। सुबह की शृंगार आरती को व्यवस्थित किया गया है। प्रतिदिन संतों पदगान भी शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा अब सीता रसोई को मां सीता अन्न क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह रसोई प्रतिदिन 30-35 हजार भक्तों को भोजन दे रही है। इसका विस्तार करते हुए किसी को भी बिना अन्न के लौटाया नहीं जाएगा। असीमित अन्न क्षेत्र में शिकायत पेटिका भी रखी जाएगी जिसकी निगरानी समिति करेगी।

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बिंदुवार व्यवस्थाओं में किया गया परिवर्तन

धार्मिक समिति का गठन : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या के संतों को जोड़ने के लिए नई धार्मिक समिति बनाई गई। पांच संतों को मिली जगह : समिति में अयोध्या के कई प्रमुख संतों के साथ ट्रस्ट के मूल संत भी शामिल किए गए, इनमें मणिराम छावनी से लेकर रामानंदीय परंपरा के संत शामिल हैं। इन प्रमुख लोगों में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी परमानंद महाराज, रामानंद संप्रदाय के महंत विनेंद्र दास, मणिरामदास छावनी के कमल दास महाराज, रामानंद दास, राजकुमार दास अधिकारी, मिथलेश नंदनी शरण का नाम प्रमुख है।

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पूजा-पद्धति का निर्धारण : भगवान की सेवा-पूजा कैसे हो, इसका पूरा निर्धारण अब यही समिति करेगी।

उत्सवों की नई तिथियों के निर्धारण की जिम्मेदारी : राम मंदिर के सभी उत्सवों की तिथि और स्वरूप कैसा हो, इसका मार्गदर्शन समिति देगी।

पहली बार झूलोत्सव पर निर्णय : जन्माष्टमी पर पहली बार रात्रि में श्री कृष्ण झूला उत्सव का आयोजन हुआ।

पंच देवता यज्ञ शुरू : मंदिर परिसर के यज्ञ स्थल में रोज पंच देवता यज्ञ विधिवत शुरू किया गया है।

शृंगार आरती में बदलाव : सुबह की शृंगार आरती को अधिक व्यवस्थित और नए स्वरूप में किया गया है।

संतों का पदगान : वैष्णव परंपरा के अनुसार मंदिर में रोज संत पदगान (भजन-कीर्तन) शुरू कर दिए।

अखंड संकीर्तन की तैयारी : शृंगार आरती से शयन आरती तक श्री राम जय राम जय जय राम विजय मंत्र का अखंड संकीर्तन एक निश्चित स्थान से लेकर समूचे परिसर में जल्द शुरू होगा।

 

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