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चंद्रगहण के कारण रक्षाबंधन पर रहेगा ये प्रभाव, जानिए

Thu, 20 Jul 2017 08:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरिद्वार
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इस बार श्रावणी पूर्णिमा को चंद्रग्रहण पड़ जाने के कारण प्रसिद्ध श्रावणी उपाकर्म और रक्षा बंधन अलग-अलग तिथियों में पड़ेंगे। 
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श्रावणी उपाकर्म इसी महीने 28 जुलाई को देशभर के पंडितों द्वारा मना लिया जाएगा, जबकि राखी बंधन का पर्व सात अगस्त को पड़ेगा। ये दोनो पर्व अलग अलग होने से रक्षा बंधन पर बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र और यज्ञोपवीत पहले ही तैयार कर लिए जाएंगे। 
     
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन पूरे देश में रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है। इसी दिन सवेरे से देशभर के तीर्थों पर पंडित और पुरोहित पवित्र रक्षा सूत्रों का संधान करते हैं तथा वर्ष भर पहने जाने वाले यज्ञोपवीत तैयार किए जाते हैं।
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यह रहेगा राखी बांधने का समय

Eclipse
तीर्थ पुरोहितों द्वारा यह दिन विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार सात अगस्त श्रावणी पूर्णिमा के दिन रात्रि 10:44 बजे से चंद्रग्रहण लग जाएगा। इस ग्रहण का समापन रात्रि 12:43 बजे होगा। परिणाम स्वरूप चंद्रग्रहण का सूतक सात अगस्त को करीब दोपहर साढ़े तीन बजे लग जाएगा।

इस हिसाब से सवेरे से शाम तक चलने वाला श्रावणी उपाकर्म नहीं हो पाएगा। शास्त्रों की व्यवस्था है कि ऐसा होने पर श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन उपाकर्म किया जाता है। यद्यपि उस दिन श्रवण नक्षत्र नही रहेगा और हस्त नक्षत्र होगा। रक्षा बंधन का पर्व मनाया तो सात अगस्त को जाएगा, किंतु भाई की कलाई पर राखी बांधने का समय दोपहर साढ़े तीन बजे तक ही रहेगा।

ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार श्रावण मास का अंत पवित्र श्रवण नक्षत्र में हो रहा है। ग्रहण के चलते सात अगस्त को श्रावणी पर्व नही मनाया जा सकता। श्रावणी उपाकर्म करने के लिए शास्त्रों ने पंचमी तिथी का निर्धारण किया है। उन्होंने बताया कि सामवेदी ब्राह्मणों का श्रावणी उपाकर्म भाद्रपद मास में मनाया जाता है। 
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