जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि ज्योतिष विशुद्ध विज्ञान है और इसे पाखंड मानने वाले लोग मूर्ख हैं। ज्योतिष में जहां गणित का महत्व है वहीं भविष्य वक्ता के जीवन में कितनी आध्यात्मिक साधना है, इसका अंतर भी मायने रखता है।
उन्होंने ज्योतिषविदों से आह्वान किया कि वे साधना के साथ ज्योतिष को अपनाते हुए भविष्यवाणियां करें। इससे उनकी भविष्यवाणियां ज्यादा सार्थक होंगी। जगद्गुरु शंकराचार्य ने बृहस्पतिवार को कनखल स्थित श्री जगद्गुरु आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय ज्योतिष शोध संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ज्योतिषाचार्यों और अपनी समस्याओं का निराकरण कराने पहुंचे लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड ज्योतिष परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रमेश सेमवाल के संयोजन में आयोजित अखिल भारतीय ज्योतिष शोध संगोष्ठी का शुभारंभ जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज और राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने किया। अपने संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि ज्योतिषी का गणित और उसकी साधना दोनों का तालमेल हो तो भविष्यवाणी पूरी तरह सटीक और सार्थक होगी।
इस दौरान उन्होंने एक पुराना संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे तो उस समय पाकिस्तान से युद्ध हुआ था। ज्योतिषियों ने बहुत समय पहले ही इस युद्ध की घोषणा कर दी थी, लेकिन भविष्यवाणी को गंभीरता से लेने के बजाय कुछ तथाकथित प्रगतिशील लोगों ने उनका उपहास उड़ाया था। आखिरकार काल ने यह सत्य कर दिखाया और पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध हुआ।
बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषियों की सलाह पर यज्ञ कराया और भारत की विजय हुई थी। जगद्गुरु शंकराचार्य ने ज्योतिषियों से आह्वान किया कि वे इधर-उधर की अफवाहों में न आकर अपनी साधनी को और सुदृढ़ करें। उन्होंने कहा कि ज्योतिष के पीछे हमारे पूर्वजों की तपस्या है। यदि हम इस तपस्या और अपनी साधना के बल पर भविष्यवाणी करेंगे तो यह ज्यादा सार्थक होगी। उन्होंने कहा कि राजसत्ता का धर्म है कि वह परिवर्तनशील होती है। आज किसी के पास तो कभी किसी के पास है। कुछ लोगों के भारत माता को डायन कहे जाने पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि देश का हिंदु समाज कुंभकरण की तरह है। जिस दिन जाग गया तो भारत माता को अपशब्द करने वालों को नहीं छोड़ेगा।