केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राम सीता कथा के मंच पर कहा कि संत नाम या पदवियों से विभूषित नहीं होते। बल्कि उनकी तपस्या और कृतित्व ही उनका भूषण होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म परायण भारत ने पूरी दुनिया को ज्ञान और विज्ञान दिया है।
भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यामित्रानंद की ओर से आयोजित किए गए राम सीता कथा के अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि जर्मन दार्शनिकों ने भी ऐसा माना था कि भारत जैसे देश को एक जन्म में नहीं समझा जा सकता।
भारत को जानने के लिए कई जन्मों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम का भाव रखने वाला भारत ही यह कह सकता है कि जो मेरे है वही तेरे में है।
उन्होंने स्वामी सत्यामित्रानंद के लंबी आयु की कामना करते हुए कहा कि कलियुग में 125 साल की आयु मनुष्य की मर्यादा मानी गई है और मर्यादा किसी को तोड़नी नहीं चाहिए। लेकिन, स्वामी जी के लिए वह यह मर्यादा तोड़ने की मांग करेंगे। सत्यामित्रानंद ने राजनाथ सिंह को स्वर्ण मंडित भारत माता मंदिर की मूर्ति भेंट करते हुए कहा कि देश फिर से चंद्रगुप्त मौर्य के काल का भारत बने।