बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए बाघिन के बाद लाया गया बाघ बाड़े से बाहर निकलने को तैयार नहीं दिख रहा है। वह तीन दिन से बाड़े में ही टहल रहा है। वहीं, इससे पहले छोड़ी गई बाघिन के पहला सांभर का शिकार करने के प्रमाण मिलने से राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारी गदगद नजर आ रहे हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए तीन बाघिन और दो बाघों को क्षेत्र में छोड़ा जाना है। इनमें 25 दिसंबर को एक बाघिन को मोतीचूर रेंज के जंगल में छोड़ा जा चुका है। 15 दिनों के बाद फिर से एक पांच से छह साल के बाघ को नौ जनवरी की सुबह मोतीचूर बाड़े में लाया गया। बाघ को मोतीचूर के जंगल में रिलीज करने के लिए शाम को बाड़े के गेट खोल दिए गए, लेकिन बाघ बाड़े में ही घूमता रहा।
अधिकारी और कर्मचारी उसके बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। वार्डन ललिता प्रसाद टम्टा ने बताया कि बाघ कुछ डरा हुआ है। इसी कारण अभी वह बाड़े में ही विचरण कर रहा है। हालांकि टीम बाघ को दो सौ मीटर के दायरे में रहकर वॉच कर रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले छोड़ी गई बाघिन के कांसरो रेंज में नदी किनारे एक बड़े सांभर का शिकार करने के सबूत मिले हैं। फिलहाल, उसकी लोकेशन रामगढ़ रेंज की सीमा के पास पहाड़ी क्षेत्र में मिल रही है।
राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से दूसरे चरण में कॉर्बेट में पार्क रामनगर से लाए गए बाघ को शनिवार देर रात मोतीचूर रेंज के जंगल में छोड़ दिया गया था। अब पार्क में टाइगरों की संख्या चार हो गई है। इस दौरान वनमंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और वन विभाग के बड़े अधिकारी शामिल रहे।
शनिवार की सुबह पांच बजे रामनगर कॉर्बेट पार्क की ट्रांसलेकेशन टीम बाघ को लेकर राजाजी की मोतीचूर रेंज पहुंची थी। बाघ को यहां बनाए गए टाइगरबाड़े में रखा गया है। बाघ ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया के तहत रेंज में पहले से मौजूद दो बाघिन के अलावा एक बाघिन को रामनगर से लाकर जंगल में छोड़ा जा चुका है। चिकित्सकों की जांच के बाद बाघ स्वास्थ होने की पुष्टि के बाद रात छह बजे जंगल में छोड़ दिया गया था।