टाइगर रिजर्व के जरूरी है फाउंडेशन का गठन
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 38 के तहत बाघों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए किसी भी सीटीआर के लिए बाघ संरक्षण फाउंडेशन का गठन किया जाना जरूरी है। अभी तक पर्यटन गतिविधियों से होने वाली पूरी आय राजस्व में जमा कर दी जाती है। फाउंडेशन बनने के बाद इसका एक हिस्सा फाउंडेशन के खाते में जमा होगा, जिसे बाघ संरक्षण के तहत कई गतिविधियों में खर्च किया जा सकेगा।
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2010 में हो गई थी कॉर्बेट में फाउंडेशन की स्थापना
कॉर्बेट फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 में हो गई थी। इसके तहत बाघ संरक्षण के अलावा कई गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम किया जाता है। इसके अलावा पारिस्थितिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने, वन्यजीवों की आवास बहाली, स्थायी आजीविका, वाटरशेड विकास, सतत ग्रामीण विकास, मानव और पशु स्वास्थ्य जैसी गतिविधियां फाउंडेशन के माध्यम से संचालित की जाती हैं।
विभाग की ओर से राजाजी टाइगर रिजर्व में कंजर्वेशन फाउंडेशन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। उम्मीद है शीघ्र ही फाउंडेशन अस्तित्व में आ जाएगा। इस पर अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व