आवास की तलाश में सैकड़ों किमी दूर चला गया
आरटीआर निदेशक बडोला ने बताया, बाघ की ओर से चार राज्यों में किया गया लंबी दूरी का प्रवास और उसकी सुरक्षित वापसी उसकी आनुवांशिक श्रेष्ठता को दर्शाती है। नर बाघों में नए आवास की तलाश में लंबी दूरी तक प्रवास करने की प्रवृत्ति अच्छे संकेत के रूप में देखी जाती है।
जीवंत है गलियारा, नया ठौर संभवत: पसंद नहीं आया
बाघ अक्सर नए ठिकाने की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इस दौरान अगर उन्हें नया निवास मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित लगता है और वहां भोजन-पानी की पर्याप्त उपलब्धता संग जीवित रहने के अन्य मापदंड ठीक रहते हैं तो वह इसे अपना लेते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो वे अपने पिछले निवास स्थान की ओर लौट आते हैं। बडोला ने बताया, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से होते हुए बाघ का लंबा और निर्बाध प्रवास यह भी संकेत देता है कि चार राज्यों से गुजरने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला गलियारा जीवित है।
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बाघ के मूवमेंट पर है लगातार नजर
निदेशक डॉ. बडोला ने बताया, हिमाचल वन विभाग बाघ के मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए है, वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उत्तराखंड वन विभाग भी बराबर बाघ की जानकारी ले रहा है। शुरुआत में बाघ के पदचिह्न मिलने पर उत्तराखंड वन विभाग ने कैमरा ट्रैप लगाए थे। इसके बाद बाघ की निगरानी के लिए हिमाचल वन विभाग की ओर से भी कुछ और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। वन कर्मियों को उत्तराखंड वन विभाग की ओर से ट्रेनिंग की भी दी गई है।