वन विभाग राजाजी नेशनल पार्क की पश्चिमी सीमा के जंगल में दूसरे इलाके से बाघ शिफ्ट करने की तैयारी में जुट गया है। इसके तहत जिस इलाके में बाघ को छोड़ा जाना है, वहां रहने वाली बाघिन के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए उस पर रेडियो कालर लगाने की योजना है।
रेडियो कालर सेटेलाइट से जुड़ा रहेगा। इससे बाघिन के वास स्थल और मूवमेंट का अध्ययन किया जाएगा। इतना ही नहीं बाघ को जिस इलाके में छोड़ा जाना है, वह वहां के वातावरण में एडजस्ट हो जाए, इसकी भी योजना बनाई गई है। इसके लिए जंगल में अस्थाई तौर पर एक बाड़ा बनाकर बाघ को रखा जाएगा, फिर एक निश्चित समय के बाद बाघ को जंगल में खुला छोड़ दिया जाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डीवीएस खाती ने बताया कि बाघिन का एरिया कहां तक है? उसका मूवमेंट पैटर्न क्या है? उस इलाके का वास स्थल (हिरन, काकड़ आदि) कैसा है, यह सब पता किया जाना है। इसी के मद्देनजर बाघिन पर रेडियो कॉलर लगाकर अध्ययन करने का फैसला किया गया है।
राजाजी नेशनल पार्क निदेशक सनातन ने बताया कि इस कार्य में वन महकमे ने डब्ल्यूआईआई, डब्ल्यूएफएफ जैसी संस्थाओं से मदद लेने का फैसला किया गया है।