यात्रा के पांचवें दिन सेम से चली नंदा छह किमी की पिलखणी धार की खड़ी चढ़ाई को पार कर अपने गांव कोटी में पहुंच गई। कोटी में करीब 4.30 बजे पहुंची नंदा का उनके भाई लाटू ने गांव के सीमा के निकट मंदार पेड़ के निकट स्वागत किया।
मान्यता है कि जब नंदा अवतरित होती है, तो इस मंदार के पेड़ से दूध निकलता है। ड्यूड़ी ब्राह्मणों के इस गांव में नंदा का मंदिर और नहाने के लिए कुंड है।
कोटी में रतूड़ा, खंडूरा, चूलाकोट, थापली और बगोली गांव की छंतोलियां भी नंदा की इस यात्रा में शामिल होंगी। स्नान और पूजा-अर्चना के बाद 12 छंतोलियां अपने वीर और पश्वाओं के साथ नंदा राजजात के अगले पड़ाव भगोती के लिए प्रस्थान करेगी।
घतोड़ा में शनिवार को मल्ल युद्ध भी है। मान्यता है कि देवी ने यहां पर राक्षसों के साथ युद्ध किया था।
सेम से पांचवें दिन नंदा राजजात सुबह साढ़े नौ बजे अगले पड़ाव कोटी के लिए शुरू हुई। सेम के अगले गांव घंडियाल में घंडियाल देवता और नैंणी देवी से नंदा ने भेंट की। यहां से आगे सिमतोली और धारकोट पहुंची देवी का भव्य स्वागत हुआ।
यात्रा में में बह रही आध्यात्म की बयार
धारकोट से करीब चार किमी की चढ़ाई चढ़ने के बाद यात्रा पिलखणी धार तक पहुंची। पिलखणी से करीब चार किमी उतरने के बाद कोटी पहुंची नंदा का भव्य स्वागत किया गया।
सड़क से जुड़े इस गांव में देवी के दर्शनों के लिए दूर-दराज से आए सैकड़ों भक्त पहुंचे। कोटी में भी नंदा के आगमन पर भक्ति और अध्यात्म की बयार बह रही है।
कोटी का नंदा मंदिर अति प्राचीन बताया जाता है। गांव की एक बुजुर्ग महिला के मुताबिक नंदा के इस मंदिर में भगवान नारायण की शयन मुद्रा में मूर्ति भी है। यात्रा में पांच गांवों की और छंतोलियों के शामिल होने के साथ अब इसका स्वरूप और बड़ा होता जा रहा है।
कोटी गांव में नंदा की डोली है, यह गांव नंदा को अपनी बेटी मानता है। बुजुर्ग महिला के अनुसार नंदा गांव की बेटी की तरह है। नंदा की डोली हर पांच साल में आसपास के गांवों का भ्रमण करती है। आगे का पड़ाव भगोती है। यहां तक पहुंचने का रास्ता सबसे कठिन पड़ाव माना जाता है।
सबकी अपनी-अपनी नंदा
कैलास की यात्रा पर निकली नंदा अभी अपने मायके में ही है। मायके की यह नंदा सिर्फ बेटी ही नहीं और भी कई रूपों में है। मान्यता है कि नंदा का नाम राजराजेश्वरी था। नंदा देवी है और राजराजेश्वरी क्षेत्र की बेटी है। अब हम राजराजेश्वरी को भी नंदा के नाम से जानते हैं।
सड़क पर जुड़े पड़ाव
यात्रा में अव्यवस्था की शिकायतों को लेकर प्रशासन सक्रिय नजर आया लेकिन हालात इस कदर हैं कि व्यवस्थाओं पर कम मीडिया पर ज्यादा नजर रखी गई। कोटी पड़ाव सीधे तौर पर सड़क से जुड़ा है। यहां पर सड़क का संपर्क ठीक है। इसी का फायदा लेते हुए प्रशासन ने अपनी ताकत झोंक दी थी। लेकिन यह कहना मुश्किल है कि अगले पड़ावों पर प्रशासन की क्या व्यवस्था होगी।