वैज्ञानिक काफी समय से मान रहे हैं कि मौसम चक्र बदल रहा है। यही वजह है कि कई बार जाड़े में बारिश और बर्फबारी नहीं होती और अप्रैल-मई में बारिश होने लगती है।
इस साल भी कुछ ऐसा ही परिवर्तन दिखाई पड़ रहा है। जाड़े के सीजन में अक्तूबर से लेकर फरवरी तक सिर्फ 25 मिमी बारिश हुई जबकि एक मार्च से 11 अप्रैल के बीच ही 39.1 मिमी बारिश हो चुकी है। आगे भी बारिश की संभावना बनी है। मौसम चक्र का यह बदलाव फसलों के लिहाज से खराब माना जा रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग और अन्य कारणों से वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन का असर पिछले काफी समय से दिखाई पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर मौसम चक्र पर भी पड़ने लगा है। आंकड़ों के मुताबिक अल्मोड़ा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में जाड़ों के सीजन में औसतन 120 मिमी बारिश होती थी। बारिश के साथ अच्छी बर्फबारी भी हुआ करती थी।
जाड़ों के सीजन में होने वाली बारिश और बर्फबारी से जहां रबी की फसल अच्छी होती है, वहीं जलस्रोत भी रिचार्ज होते हैं, लेकिन इस बार जाड़े के चार महीनों में सिर्फ 25 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। यह औसत बारिश का करीब 20 प्रतिशत है। जाड़ों में बारिश नहीं होने से रबी की फसलों को 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। अब जबकि गेहूं सहित रबी की फसलें तैयार हो चुकी हैं तो बारिश और ओलावृष्टि से इन फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
जाड़ों में औसत से काफी कम बारिश हुई, जबकि अप्रैल में तेज बारिश हो रही है जो फसलों के लिहाज से ठीक नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र में इस तरह का बदलाव हो रहा है। जाड़े में अच्छी बारिश हुई होती तो रबी की फसल अच्छी होती और वहीं ग्लेशियरों में काफी बर्फ जमा होने से गर्मी में जल स्रोत और नदियों में पानी की कमी नहीं रहती।
- किरीट कुमार, निदेशक जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल (अल्मोड़ा)
अल्मोड़ा में जाड़ों के सीजन में हुई बारिश के आंकड़े
अक्तूबर- 0.4 मिमी
नवंबर - 00 मिमी
दिसंबर- 3.8 मिमी
जनवरी- 6.6 मिमी
फरवरी- 14.2 मिमी
मार्च - 5.6 मिमी
अप्रैल (अब तक) 33.5 मिमी