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बारिश से हुआ 50 हजार बीघा फसल का 'नाश'

Tue, 03 Mar 2015 01:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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पहले दिन तो बे-मौसमी बारिश किसानों की फसलों के लिए अभिदान लेकर आई, लेकिन दूसरे दिन की बारिश के साथ चली हवा फसलों के लिए अभिशाप बन गई। इससे गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। अभी तक मिले सरकारी आंकड़ों के अनुसार 50 हजार बीघा फसल खेतों में बिछ गई है।
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रविवार को सुबह शुरू हुई बारिश गेहूं एवं अन्य फसलों को फायदा हुआ था। जिससे किसान खुश थे, लेकिन जब शाम तक भी बारिश नहीं रुकी तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी। रुक-रुक कर बारिश जारी रहने के साथ ही रविवार की रात में आई हवाओं के चलते गेहूं की अगेती प्रजाति की फसल नीचे गिर गई।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जनपद में 46 हजार हेक्टेयर फसल से ज्यादा भूमि पर गेहूं की फसल खड़ी हुई है। अभी तक इसमें से तीन हजार हेक्टेयर से अधिक यानी करीब 50 हजार बीघा गेहूं खेतों में बिछ गया है। जिससे गेहूं के उत्पादन और गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। सरसों, मशरूम, मटर वाले खेतों में भी बारिश ने कहर बरपाया है।
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क्षेत्र के मंगलौर, लक्सर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, सुल्तानपुर, भगवानपुर सहित सभी क्षेत्रों में गेहूं की फसलें गिर गई। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश एक-दो दिन और नहीं रुकती तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
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गन्ने की बुआई होगी प्रभावित

बारिश के चलते गन्ने की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों को भी झटका लगा है। खेतों में पानी भर जाने से गन्ने की बुआई करने के लिए अब उन्हें तैयार करने के लिए ही करीब एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा।

पानी सूखने के बाद ही किसान खेतों में निराई-गुड़ाई की तैयारी कर सकेंगे। जिससे गन्ने की बुआई दो सप्ताह तक लेट हो सकती है।

बंपर उत्पादन को झटका
गेहूं का रकबा तीन साल में पहली बार इस साल सबसे अधिक हुआ था। साथ ही फसल में अधिक रोग भी नहीं थे। जिससे इस बार रकबा बढ़ने के साथ ही प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद कृषि अधिकारी लगा रहे थे, लेकिन हवाओं के साथ आई बारिश से गेहूं की फसल को नुकसान होने से अरमानों पर पानी फिर सकता है।

मधुमक्खी पालकों को भी नुकसान
दो दिन से लगातार बारिश जारी रहने से मोन (मधुमक्खी) पालन को भी नुकसान हुआ है। पूरे दिन बारिश के चलते मधुमक्खियों के डिब्बों से बाहर नहीं निकलने से शहद के उत्पादन पर फर्क पड़ेगा।

तेज्जूपुर के मोन पालक ओमपाल चौधरी, रणमलपुर के बालेश्वर, डकरावर के पुष्पेंद्र ने बताया कि बारिश, हवाओं से सरसों और लिप्टिस पर आया फूल अधिक मात्रा में झड़ गया है। जिससे आने वाले दिनों में मधुमक्खियों को शहद कम मिलेगा। साथ ही मोन वंश की वृद्धि पर भी कुप्रभाव पड़ेगा।

बारिश के साथ आई हवाओं से गेहूं समेत सभी फसलों को नुकसान हुआ है। अभी तक तीन हजार हेक्टेयर फसल गिरने की रिपोर्ट आई है। जिससे उम्मीद के अनुसार उत्पादन कम मिलेगा।
- जेपी तिवारी, मुख्य कृषि अधिकारी
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