उत्तराखंड की राजधानी। हाड़ कंपाने वाली ठंड और रात को तापमान दो डिग्री। बाहर सड़क पर शीतलहर से मरघट सा सन्नाटा। लेकिन इस ठंड में कुछ ऐसे बेसहारा भी हैं, जिनके लिए हर रात नगर निगम की लापरवाही से दर्द बनकर आती है। रैन बसेरे में रात काटने जाते हैं तो ताले लटके मिलते हैं।
बड़े-बड़े दावे करने वाले निगम प्रशासन की पोल तब खुली, जब अमर उजाला टीम ने रात 10:30 बजे से 11:15 बजे तक रैन बसेरों की पड़ताल की। इस दौरान लोग ठंड से ठिठुरते मिले।
उधर, महापौर को जब मौके से कई बार फोन किया गया तो वह शायद नींद में थे और फोन नहीं उठाया। लेकिन उनका क्या, जो रातभर निगम को कोसते हुए सड़क पर जिंदगी काट रहे हैं। पेश है अमर उजाला के रिपोर्टर सुनीत द्विवेदी और फोटो
जर्नलिस्ट संजय नेगी की पड़ताल...