रेलवे अधिकारी सुनील कुमार बलूनी ने खुदकुशी के लिए भले ही दलाल और ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन उनकी मौत का दलालों पर असर नहीं पड़ा है।
बलूनी की मौत की जानकारी मिलने के तुरंत बाद देहरादून अमर उजाला टीम ने दून रेलवे स्टेशन का जायजा लिया तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। रेलवे कर्मचारियों के सामने ही दलाल पिछले गेटों से टैक्स चोरी का माल पार करते रहे। हालांकि रेलवे कर्मचारियों की जुबान पर बलूनी की मौत की चर्चा थी।
अधिकतर इसके लिए दलालों को ही जिम्मेदार भी ठहरा रहे थे। इसके बावजूद मंगलवार को स्टेशन से चोरी से माल पार होने दिया। किसी ने दलालों को रोकने की कोशिश तक नहीं की। पुलिस, आरपीएफ और वाणिज्य कर विभाग का कोई कर्मचारी भी नजर नहीं आया।
दोपहर 2:50 बजे
रेलवे स्टेशन पर स्तब्ध रेलकर्मी बलूनी की खुदकुशी की चर्चा करते रहे। हर कोई यही कहता रहा कि दलालों ने एक अधिकारी की जान ले ली। कुछ ने विजिलेंस कार्रवाई को एकतरफा भी बताया। उधर, स्टेशन पर पार्सलों का ढेर लगा था।
दोपहर तीन बजे
पार्सल सेक्शन में रेलवे कर्मचारी मौजूद थे। पार्सल लेने आ रहे लोगों से रसीद लेकर सामान सुपुर्द किया जा रहा था। जिस केबिन में बलूनी बैठते थे, वहां दो कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने कुछ भी कहने इनकार कर दिया। इस बीच बाहर दलाल मंडराते रहे।
दोपहर 3:15 बजे
पार्सल सेक्शन के बाहर लगे सामान के ढेर को ठेलियों पर उठाकर ले जाया जाने लगा था। कुछ दलाल सक्रिय नजर आए। बेखौफ दलाल कुलियों को सामान उठाकर स्टेशन के पिछले दरवाजे की ओर निकलने का इशारा करते रहे।
दोपहर 3:30 बजे
रेलवे स्टेशन के पार दूसरी ओर, पटरियों के पार सिंघल मंडी के रास्ते पर दलालों की भीड़ जुटी थी। कुछ लोडर भी वहां नजर आए। स्टेशन से कुली जो सामान ढोकर ला रहे थे, दलाल उन्हें इन लोडरों में रखवाकर रवाना करते रहे।
विजिलेंस को नहीं दिखते दलाल
रेलवे स्टेशन पर रेलवे, सेल्स टैक्स, आरपीएफ, जीआरपी की मौजूदगी के बावजूद दलालों को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। दलालों की सक्रियता पर रेलकर्मी भी दबी जुबान में कहते रहे कि विजिलेंस को छापे के दौरान दलाल नजर नहीं आते। इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।
दिल्ली तक फैला है नेटवर्क
दलालों का नेटवर्क दून से दिल्ली तक फैला है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में निर्धारित क्षमता से अधिक माल ट्रेन में लादा जाता है। ट्रेन के रवाना होते ही दून में दलालों को जानकारी दे दी जाती है। दून स्टेशन से टैक्स चोरी कर माल को बाहर निकाल व्यापारी केगोदाम तक पहुंचाने का काम दलालों का होता है।
इसके एवज में ठेकेदार को मोटी रकम मिलती है। सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार रेलवे समेत विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी हिस्सा देते हैं। इसी वजह से टैक्स चोरी का खेल जारी रहता है। सूत्रों की मानें तो जांच में कई बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।
एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
स्टेशन पर दलालों की सक्रियता के लिए संबंधित सभी विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हैं। स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल का कहना है कि रेलवे यही देख सकता है कि सामान निर्धारित क्षमता के तहत आ रहा है या नहीं। टैक्स चोरी पकड़ना वाणिज्य कर विभाग का काम है।
वाणिज्य कर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त एनसी जोशी कहते हैं कि रेलवे से सहयोग नहीं मिलने के कारण ही दलाल सक्रिय हैं। बताया कि पिछले दिनों विभाग ने स्टेशन पर 70 लाख रुपए का सामान जब्त किया।
रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के इंस्पेक्टर डीके राणा और जीआरपी थानाध्यक्ष आरपी सती का कहना है कि वे संदिग्धों पर नजर रखते हैं। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति के पास रेलवे रसीद (आरआर) होती है, उन्हीं को पार्सल कक्ष के पास आने दिया जाता है।
रेल कर्मचारियों की सीबीआई जांच की मांग
सीनियर रेलवे ट्रैफिक इंस्पेक्टर (एकाउंट) सुनील कुमार बलूनी की खुदकुशी से दून के रेलवे कर्मचारी सकते में हैं। बलूनी पर कार्रवाई से भड़के रेल कर्मियों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है। नार्दर्न रेलवे मैन्स यूनियन (नरमू) ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
मंगलवार को रेल कर्मचारियों को जैसे ही बलूनी की आत्महत्या की जानकारी मिली, वे स्तब्ध रह गए। कर्मचारियों का कहना है कि बलूनी ने निर्धारित क्षमता से ज्यादा माल लाने वाले ठेकेदार पर जुर्माना लगाने की बात कही थी। इसी रंजिश में उन्हें फंसाया गया। बलूनी इस पर कुछ दिन से परेशान थे।
कर्मचारियों का कहना है कि बलूनी ने कहा था कि दलाल खुलकर अवैध तरीके से माल निकाल कर रेलवे को हर रोज हजारों का चूना लगा रहे हैं। वह उन पर लगाम कसना चाहते थे। कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि बलूनी ने कहा था कि निलंबन के बाद कुछ दलाल उन्हें देखकर चिढ़ाने की कोशिश करते हैं, इससे वह मानसिक दबाव में थे।
कर्मचारियों ने रेलवे विजिलेंस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि बार-बार दिल्ली बुलाकर विजिलेंस बलूनी का उत्पीड़न करती रही। उनका कहना है कि झूठे आरोपों और विजिलेंस के उत्पीड़न से परेशान होकर ही बलूनी आत्महत्या के लिए मजबूर हुए हैं।
नरमू के शाखा सचिव उग्रसेन सिंह ने मांग की कि मामले की सीबीआई जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए। बताया कि बुधवार को यूनियन दफ्तर में बलूनी की श्रद्धांजलि के लिए शोकसभा होगी।