ज्यादा मुनाफे के चक्कर में रेलवे विभाग को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
देहरादून रेलवे को पार्किंग से सालाना जो 16 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा था वह भी ज्यादा राजस्व के लालच में 17 नवंबर 2017 को ठेका निरस्त होने पर बंद हो गया। उसके बाद से वाहन बेतरतीब खड़े हो रहे हैं। ‘संवाद’ कार्यक्रम में उठे इस मुद्दे का डीआरएम ने जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।
डीआरएम एके सिंघल शुक्रवार को देहरादून रेलवे स्टेशन में कर्मचारियों से संवाद करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों से उनकी परेशानियां जाननी चाहिए तो समस्याओं का अंबार लग गया। एनआरएमयू के ब्रांच सेक्रेटरी राजेंद्र गुसाईं ने डीआरएम को बताया कि स्टेशन और रेलवे कालोनियों की सफाई व्यवस्था के लिए महज नौ कर्मचारी तैनात हैं। जबकि स्वीकृत 65 पद हैं। वर्षों से इन पदों पर नियुक्ति न होने का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा स्टेशन का सौंदर्यीकरण भी नहीं हो रहा है।
स्टेशन पर फैली अव्यवस्थाओं का जिक्र एक-एक करके होता रहा और डीआरएम गौर से सुनते रहे। आखिरकार प्रयास करने का आश्वासन देकर वह चलते बने। पार्किंग ठेका बहाली को लेकर उन्होंने कहा कि दाम अच्छा न मिलने के कारण टेंडर निरस्त करना पड़ रहा है। इस पर संगठन नेता राजेंद्र गुसाई ने तर्क दिया कि पूरा नुकसान होने से बेहतर है कि सालाना करीब 16 लाख का राजस्व तो बरकरार रहे। इस पर सहमति जताते हुए डीआरएम ने जल्द निर्णय लेने की बात कही।
स्वास्थ्य निरीक्षक थूकने वालों से परेशान
पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है, लेकिन स्टेशनों का हाल पहले जैसा ही नजर आता है। देहरादून रेलवे स्टेशन पर रखे गमलों में पौधे लोगों के पान मसाले के थूक से बदरंग कर दिए हैं। कई पौधे सूख चुके हैं। स्वास्थ्य निरीक्षक प्रीतम सिंह का कहना है कि ये बहुत गलत है। दो कर्मचारी रोजाना पान मसालों की पुड़िया और थूक से भरे गमलों की गुड़ाई कर साफ करने में तैनात करना पड़ रहा है। लाख कोशिश के बावजूद गंदगी फैलाने वालों पर अंकुश नहीं लग रहा है।