चुनावी सीजन में आये रेल बजट को देहरादूनवासी उत्तराखंड के हिसाब से मिला जुला मानते हैं। राज्य को अलग से कोई बड़ी सौगात न मिलने से लोगों में मायूसी भी है।
वहीं, रेल किराया न बढ़ाने, ऑनलाइन टिकट पर सर्विस चार्ज खत्म करने और स्टेशनों के मार्डेनाइजेशन जैसी घोषणाओं से लोगों ने राहत की सांस भी ली है।
रेलवे के सेवानिवृत्त मंडल अभियंता गोपाल दत्त चौकियाल के अनुसार, उत्तराखंड के लिए रेल बजट में कोई नई परियोजना की घोषणा न होना जरूर मायूस करने वाली बात है। रेलवे की आय बढ़ाने के लिए कुछ और साधन उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था।
हालांकि रेलवे की आईआरसीटीसी की वेबसाइट से ऑनलाइन टिकट खरीद पर सर्विस चार्ज खत्म कर डिजिटल इंडिया की दिशा में सकारात्मक निर्णय वित्त मंत्री ले लिया है। इसी तरह, यात्री किराया और माल भाड़ा न बढ़ाए जाने से यात्री राहत महसूस कर सकते हैं।
रेलवे के रिटायर्ड चीफ रिजर्वेशन सुपरवाइजर दिवाकर का कहना है कि बजट में कुछ खास नहीं है। इतना जरूर है कि किराया और माल भाड़ा स्थिर रखकर यात्रियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। इसके साथ ही बजट में रेलवे की आय बढ़ाने पर भी फोकस होना चाहिए था।
मानवरहित फाटकों को खत्म करने पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। दरअसल, इसमें कई तरह की श्रेणियां होती हैं। जिस पर बजट के तथ्य पूरी तरह बारीकी से सामने आने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।