रेल बजट में उत्तराखंड में सीमा की सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर केंद्र सरकार का फोकस कमजोर दिखा।
चीन सीमा पर सामरिक रेल परियोजना को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं में उत्तराखंड शामिल नहीं है। गुरुवार को आए रेल बजट में चीन से सर्वाधिक सीमा विवाद वाले अरुणाचल प्रदेश को तो तरजीह दी गई, लेकिन उत्तराखंड की चिह्नित चार सामरिक परियोजनाओं पर रेल मंत्री के पिटारे से सिवाय ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था के अलावा कुछ नहीं निकला।
यह हाल तब है जबकि चीन अपने अधीन आने वाले क्षेत्र में उत्तराखंड सीमा तक रेल और सड़कों का जाल बिछा चुका है। बीते कुछ वर्षों में चीनी सेना के अंतरराष्ट्रीय सीमा उल्लंघन के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में सेना की उत्तराखंड में सैन्य विस्तार की योजनाओं को भी झटका लगा है।
सेना उत्तराखंड में चीनी घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर भी अपनी तैनाती बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सीमांत क्षेत्रों में हथियारों की सप्लाई और अन्य कार्यों के लिए यातायात के बेहतर संसाधनों की जरूरत काफी लंबे समय से महसूस की जा रही है।
प्रदेश में रेल मार्ग बनने से सैन्य बलों के अलावा स्थानीय लोगों को भी इसका काफी लाभ मिलता, लेकिन रेल बजट में उत्तराखंड को मायूसी ही हाथ लगी है। इसके चलते सेना को उत्तराखंड से लगी चीन सीमा पर अपनी सैन्य तैनाती मजबूत करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
उत्तराखंड में प्रस्तावित रेलवे ट्रैक
- ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच 160 किलोमीटर
- देहरादून से उत्तरकाशी के बीच 90 किलोमीटर
- टनकपुर से बागेश्वर के बीच 155 किलोमीटर
- टनकपुर से जौलजीबी के बीच 90 किलोमीटर
नेटवर्क विस्तार को लेकर फिर खामोशी
प्रदेश की सबसे बड़ी मांग रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर थी। इस बार सुरेश प्रभु ने रेल नेटवर्क के विस्तार से किनारा कर प्रदेश को मायूसी ही किया। पिछले सौ साल में प्रदेश में रेल एक इंच भी आगे नहीं खिसक पाई है।
राज्य गठन के बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर काम शुरू हुआ पर इसकी रफ्तार धीमी है। इस बार बजट में इस रेल लाइन के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर पिछले बजट में चार धाम की रेल संबद्धता के लिए सर्वे का ऐलान किया गया था पर इस बार इस पर बिल्कुल ही खामोशी है।
यह संबद्धता प्रदेश के लिए तीर्थाटन के साथ ही सीमा सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसका कोई भी जिक्र न होना प्रदेश को निराश कर सकता है। इसके अलावा करीब एक दर्जन पुरानी घोषणाएं हैं जिनका कोई हवाला रेल बजट में नहीं है।
दून रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित करने की बहुत पुरानी घोषणा है लेकिन बजट में इसका उल्लेख नहीं है। ऐसे में रेल बजट को प्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ दल ने भी निराशाजनक करार दिया। इस बार भाजपा के पांच सांसदों का प्रतिनिधित्व होने के कारण भी प्रदेश को उम्मीद थी कि उनके हिस्से कुछ जरूर आएगा।
रेल बजट में सर्वे की स्थिति
कई परियोजनाओं और मार्गों के लिए सर्वे की पुरानी घोषणा को शामिल किया गया है। इसके लिए टोकन मनी भी जारी करने का ऐलान किया गया है। हालांकि ज्यादातर सर्वे के लिए पहले जारी किया गया बजट खर्च ही नहीं किया गया है।
बजट खर्च
घनोली देहरादून के बीच प्रारंभिक सर्वे के लिए कोई नया प्रावधान नहीं 56 हजार रुपये शेष (पूर्व के बजट के)
हरिद्वार-रामनगर मार्ग का सर्वे अपडेट-पांच लाख
ऋषिकेश-डोइवाला मार्ग -दो लाख
देहरादून-पुरोला यातायात सर्वे-एक लाख
देहरादून-उत्तरकाशी-कोई बजट प्रावधान नहीं
काशीपुर-धामपुर यातायात सर्वे-दो लाख
कर्णप्रयाग-चमोली यातायात सर्वे-5 लाख
हरिद्वार-देहरादून केबीच दोहरीकरण के लिए यातायात सर्वे-दस लाख
देहरादून-कर्णप्रयाग को चार धाम से जोड़ने के लिए यातायात सर्वे-2.89 लाख
देहरादून-सहारनपुर के बीच यातायात सर्वे- इस बार के बजट में चार हजार रुपये की टोकन मनी की व्यवस्था, पुराने बजट के दस लाख शेष
ऋषिकेश-देहरादून के बीच यातायात सर्वे-इस सर्वे में टोकन मनी एक हजार की व्यवस्था, पुराने बजट का 2.99 लाख शेष
देहरादून-कालसी-एक हजार रुपये की टोकन मनी जारी, 7.03 लाख पुराने बजट का शेष
हल्द्वानी-चोरगलिया यातायात सर्वे-2.89 लाख
हल्द्वानी-रीठा साहब-यातायात सर्वे-3.99 लाख
भोजीपुरा-टनकपुर ब्रॉडगेज काम के लिए मिले 30 करोड़