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पढ़िए, उत्तराखंड के लिए क्या ले आई 'प्रभु' की रेल

Fri, 27 Feb 2015 02:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु के बजट में उत्तराखंड के लिए पूर्व घोषित योजनाओं को अमली जामा पहनाने पर ज्यादा जोर दिया गया। बजट में पूर्व घोषित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसे कम बताया जा रहा है।
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देवबंद-रुड़की और हरिद्वार-लक्सर रेल लाइन के लिए भी बजट में नए सिरे से प्रावधान किए गए हैं, हालांकि ये पुरानी घोषणाएं है। दून में मोहकमपुर सहित चार रेलवे ओवरब्रिज के लिए प्रावधान किया गया है और यह राहत दे सकता है। हालांकि यह भी है कि ये सारी पुरानी घोषणाएं हैं। बजट में हरिद्वार स्टेशन को पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से विकसित करने का इरादा जाहिर किया गया है। यह तीर्थ नगरी के लिए राहत भरी खबर हो सकती है।

ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग मार्ग
परियोजना 4295 करोड़ रुपये की है। मार्च 2014 तक इस परियोजना पर केवल 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा सके। 2014-15 में इस पर संशोधित परिव्यय 20 करोड़ किया गया। अब 2015-16 के लिए प्रस्तावित परिव्यय 150 करोड़ रुपये रखा गया है।
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देवबंद-रुड़की परियोजना
देवबंद-रुड़की रेल परियोजना पर अभी तक करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा चुकेहैं। इस पर पीपीपी के तहत इस परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

लक्सर -हरिद्वार मार्ग दोहरीकरण
हरिद्वार-लक्सर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए कुल 140 करोड़ रुपये का प्रावधान।

बजट में उत्तराखंड के लिए और क्या

हरिद्वार में 24 कोच की ट्रेन को चलाने की सुविधाओं का विकास
हरिद्वार-देहरादून के बीच 18 कोच की ट्रेन को चलाने की सुविधाओं का विकास

सड़क सुरक्षा ओवर ब्रिज
लक्सर-सहारनपुर
लक्सर-देहरादून
मोहकमपुर क्रोसिंग
राइवाला देहरादून
ट्रेक नवीनीकरण
लक्सर-देहरादून
राइवाला-ऋषिकेश
देहरादून, ऋषिकेश में धुलाई और लाइनों के स्थिरीकरण की सुविधा का विकास
दून के ओक ग्रोव स्कूल में 50 शैय्या की डॉरमेटरी
हरिद्वार रेलवे स्टेशन का पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से विकास

ज‌िसने क‌िया न‌िराश
प्रदेश की सबसे बड़ी मांग रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर थी। इस बार सुरेश प्रभु ने रेल नेटवर्क के विस्तार से किनारा कर प्रदेश को मायूसी ही किया। पिछले सौ साल में प्रदेश में रेल एक इंच भी आगे नहीं खिसक पाई है।

राज्य गठन के बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर काम शुरू हुआ पर इसकी रफ्तार धीमी है। इस बार बजट में इस रेल लाइन के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर पिछले बजट में चार धाम की रेल संबद्धता के लिए सर्वे का ऐलान किया गया था पर इस बार इस पर बिल्कुल ही खामोशी है।

यह संबद्धता प्रदेश के लिए तीर्थाटन के साथ ही सीमा सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसका कोई भी जिक्र न होना प्रदेश को निराश कर सकता है। इसके अलावा करीब एक दर्जन पुरानी घोषणाएं हैं जिनका कोई हवाला रेल बजट में नहीं है।

दून रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित करने की बहुत पुरानी घोषणा है लेकिन बजट में इसका उल्लेख नहीं है। ऐसे में रेल बजट को प्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ दल ने भी निराशाजनक करार दिया। इस बार भाजपा के पांच सांसदों का प्रतिनिधित्व होने के कारण भी प्रदेश को उम्मीद थी कि उनके हिस्से कुछ जरूर आएगा।
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उत्तराखंड के साथ सांसदों को तवज्जो नहीं: CM

पहाड़ के विकास और राष्ट्रहित में भी सीमांत राज्यों को ज्यादा से ज्यादा रेलमार्ग से जोड़ा जाना चाहिए। यह मांग हमने रेल मंत्री से की थी, लेकिन एक बात साबित हो गई कि केंद्र की भाजपा सरकार ने उत्तराखंड के साथ ही अपने पांचों लोकसभा सांसदों को भी तवज्जो नहीं दी है। मैं राज्य के लिए हमेशा पैरवी करता रहूंगा और एक बार फिर रेल मंत्री से जाकर मिलूंगा।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

भाजपाइयों ने बताया प्रगतिशील रेल बजट
इस बजट में विकास की असीम संभावनाएं हैं। बीच-बीच में भी निर्णय होंगे। ढांचागत विकास होगा तो नई रेल, नए स्टेशन भी बनेंगे। नई परियोजनाएं भी आएंगी। इसलिए यह बजट बहुत उपयुक्त है।
-भगत सिंह कोश्यारी, नैनीताल से भाजपा सांसद

रामनगर से चौखुटिया व गैरसैंण तक रेल लाइन के सर्वेक्षण की मंजूरी मिली है। यह मार्ग 230 किमी लंबा होगा। दून-सहारनपुर, ऋषिकेश-दून व कालसी-दून रेलमार्ग की लाइन बिछाने का काम अपने हाथ में ले लिया है। उत्तराखंड में रेल कार्यों के लिए केंद्र ने 304 करोड़ दिए हैं। 334 करोड़ यात्रियों की सुविधा के लिए भी प्रदेश के हिस्से आए हैं। मैकेनिकल कार्यों के लिए भी धनराशि दी गई है।
-तरुण विजय, राज्यसभा में भाजपा सांसद

रेल यात्रा को सुरक्षित बनाना ही सबसे बड़ा काम है। जो पुराने प्रोजेक्ट उत्तराखंड में लंबित हैं, इस बजट से उन्हें पूरा करने में मदद मिलेगी। यह एक प्रगतिशील रेल बजट है।
-तीरथ सिंह रावत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

बेहतर बजट वही होता है जो व्यवस्थागत चीजों को संतुलित करे और जन सुविधाएं उपलब्ध कराए। यह रेल बजट इसी तरह का है। यह बजट मुकम्मल है और इससे पुरानी घोषणाएं धरातल पर उतर सकेंगी।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व राष्ट्रीय सचिव
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