बुधवार को पेश हुए रेल बजट में उत्तराखंड को दो नई ट्रेंनों की सौगात मिली है। इसके साथ ही अब रानीखेत एक्सप्रेस जेसलमेर तक जाएगी। उत्तराखंड को लखनऊ-काठगोदाम वीकली और रामनगर-चंडीगढ वीकली एक्सप्रेस मिली है।
68 नई ट्रेंने
इसके साथ ही किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कुल 68 नई ट्रेंने मिलीं हैं। जिसमें नई एसी ट्रेनों के साथ 38 एक्सप्रेस ट्रेन व 17 एसी प्रीमियम ट्रेनें होंगी। इसके साथ ही तीन नए कारखानों का एलान भी किया गया।
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारी हंगामे के बीच बुधवार को सदन के पटल पर रेल बजट पेश किया। लेकिन वह बजट पूरा नहीं पढ़ पाए।
रेल लाइन के लिए प्रदेश्ा में काफी आंदोलन किए गए। यहां के जनप्रतिनिधियों ने भी संसद में आवाज उठाई, लेकिन योजनाएं जमीन पर नहीं उतर सकीं। रेल को ऋषिकेश से आगे कर्णप्रयाग तक ले जाने का ड्रीम प्रोजेक्ट सांसद सतपाल महाराज का है।
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इसके लिए केंद्रीय मंत्री ए.के.एंटोनी 2009 में गोपेश्वर में शिलान्यास भी कर चुके हैं। रेलवे ने सर्वे भी किया, लेकिन काम कुछ नहीं हुआ। इसी तरह मसूरी और कालसी तक रेल पहुंचाने में बतौर सांसद विजय बहुगुणा ने भी पहल की।
जंतर-मंतर में भी धरने-प्रदर्शन
संसद में बात रखी तो सर्वे भी हुआ, लेकिन नतीजा शून्य रहा। कुमाऊंकी बात करें तो टनकपुर से आगे बागेश्वर तक रेल लाइन की मांग सालों से होती रही है। इसके लिए न सिर्फ उत्तराखंड में बल्कि दिल्ली के जंतर-मंतर में भी धरने-प्रदर्शन हुए।
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उत्तराखंड के राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र में भी हर बार रेल लाइन बिछाने की बात कही जाती है। वहीं कुमाऊं में रामनगर से चौखुटिया रेलवे लाइन की मांग भी पुरानी है।
जहां तक रेल लाइन हैं, वहां से देश के बड़े शहरों के लिए नई ट्रेन और लोकल यात्रियों के लिए अधिक ट्रेनों की मांग भी जस की तस है।
देहरादून से काठगोदाम के लिए दोनों तरफ से रात की ट्रेन है जबकि सुबह ट्रेन चलाने की मांग अनसुनी है। काठगोदाम से बरेली तक लोकल ट्रेन चलाने की मांग भी पुरानी है।
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अभी लालकुआं तक ही लोकल ट्रेन आती जाती हैं। मुंबई, कोलकाता, चैन्नई केसाथ दिल्ली के लिए अधिक ट्रेन की मांग भी लगातार होती रही है।
यहां 18 साल बाद भी सर्वे नहीं
सन् 1996 में तत्कालीन रेल मंत्री सतपाल महाराज ने देहरादून से सहारनपुर रेल लाइन के सर्वेक्षण कार्य के शिलापट का अनावरण किया था। रेलवे स्टेशन पर यह शिलापट आज भी मौजूद है। लेकिन 18 साल बाद भी काम इससे आगे नहीं बढ़ा है।
हम काफी समय से विशेष ट्रेन देहरादून-जगन्नाथपुरी चलाए जाने की मांग कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि विशेष तौर पर चार धाम के दौरान उड़ीसा और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग यहां का सफर करते हैं। लगभग 15-20 साल से इस मांग को अनसुना किया गया है। इस बार इसकी घोषणा होनी चाहिए।
- सुभाष चंद्र शतपथी, उत्कल समाज