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रैबार: देश की नामचीन हस्तियों के सामने उत्तराखंड CM ने गिनाई उपलब्धियां

Sun, 05 Nov 2017 05:53 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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raibar - फोटो : amar ujala
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राज्य स्थापना के 17 सालों के बाद उत्तराखंड किस मुकाम पर पहुंचा, इसको लेकर आज देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में इस पर मंथन शुरू हो गया है। कार्यक्रम की शुरुआत लोक नृत्यों के साथ हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संबोधन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गई। सुबह 11 बजे बाद शुरू हुआ यह पैनल डिस्कशन देर शाम तक जारी रहेगा। 
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अपने संबोधन में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य के विकास के लिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। हमारी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, गुड गवर्नेंस के लिए जनता से लगातार संवाद और जन भागीदारी की जा रही है।

हमने  जनता की शिकायतों के लिए टोल फ़्री नम्बर 1905 की शुरुआत की है। 162 नई सेवाए सेवा के अधिकार में जोड़ी हैं। बायोमेट्रिक हाजिरी प्रक्रिया शुरु की गई। उत्तराखंड देश के पांच राज्यों में शामिल हुआ है, जहां कृषि उर्वरक डीबीटी की शुरुआत हुई है। हमारी सरकार द्वारा शुरु सीपेट और एनआईएफटी की शुरुआत से प्रदेश को लाभ होगा।
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ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कन्वेन्शन सेंटर खोला जाएगा। पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी की शुरुआत की गई है। खेती में क्लस्टर अप्रोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में राजेंद्र सिंह डीजी कोस्ट गार्ड, अश्विनी लोहानी रेलवे बोर्ड चेयरमैन, भास्कर ख़ुल्बे सचिव प्रधानमंत्री, एसएस नेगी उपाध्यक्ष पलायन आयोग मंच पर मौजूद रहे। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हुआ। दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री ने मीडिया से मुखातिब होकर चर्चा के बारे में जानकारी दी। रैबार कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रेस कांफ्रेंस में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर कार्यक्रम का हुआ आयोजन उस दिशा में कइम बढ़ा रहे हैं। उत्तराखण्ड राज्य के लिए आने वाले समय में यह कार्यक्रम काफी लाभदायक होगा। कहा कि आगे भी समय-समय पर इन सभी बढ़ी हस्तियों को बुलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रैबार का मकसद पूरा होता हुआ नज़र आ रहा है। चर्चा में पर्यटन, स्वच्छता सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को लेकर गहन मंथन हुआ। इस दौरान पीएम के सचिव ने स्किल डेवलपमेंट पर विशेष फोकस किया। चर्चा में पाया गया कि पलायन पर भी सभी वक्ताओं ने चिंता जताई। पौड़ी और अल्मोड़ा में अधिक पलायन हुआ है। जनसंख्या का ग्रोथ दोनों जगहों पर माइनस गया है। खेती,बागवानी और पर्यटन को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। 
बता दें कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित रैबार कार्यक्रम में उत्तराखंड की वो विभूतियां शामिल हो रही हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में ऊंचाइयों को प्राप्त किया है और राज्य को अलग पहचान दिलाई है। मंथन से निकलने वाले राय के मुताबिक राज्य के विकास को गति देने की योजना बनाई जाएगी।
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ये विभूतियां रहेंगी कार्यक्रम में मौजूद

raibar
रविवार को आयोजित 'रैबार' कार्यक्रम में 17 सालों में उत्तराखंड ने विकास तो किया है, लेकिन विकास के मामले में हम अन्य राज्यों की तुलना हम कहां टिकते हैं इसको लेकर मंथन किया जा रहा है। पर्यटन, पर्यावरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर, उद्योग-धंधे, रोजगार, कृषि और सूचना तकनीक पर मंथन किया जाएगा।

रैबार कार्यक्रम में तीन तकनीकी सत्र होंगे। पहले सत्र में पर्यटन और पर्यावरण को लेकर चर्चा होगी, तो दूसरे सत्र में निवेश, बुनियादी क्षेत्र, उद्योग और सूचना तकनीक को लेकर। तीसरे सत्र में विशेषज्ञ ऐसे बनेगा नया उत्तराखंड विषय पर अपने विचार रखेंगे।

विभूतियां:
जनरल विपिन रावत- थल सेनाध्यक्ष 
भास्कर खुल्बे -  प्रधानमंत्री के सचिव
अश्विनी लोहानी - चेयरमैन, रेलवे बोर्ड
अनिल धस्माना  - चेयरमैन, आर एंड एडब्लू
आलोक जोशी   - चेयरमैन, एनटीआरओ
राजेंद्र सिंह    - डायरेक्टर जनरल कॉस्ट गार्ड
प्रसून जोशी      चेयरमैन, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन
कर्नल अजय कोठियाल - प्रिंसिपल, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान
राजेंद्र डोभाल    डायरेक्टर जनरल, यूकॉस्ट
बछेंद्री पाल        पर्वतारोही 
डॉ. अनिल जोशी  पर्यावरणविद
आचार्य बालकृष्ण - सीईओ, पतंजलि 
आलोक अभिताभ डिमरी - विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव
डीडी मिश्रा         - डायरेक्टर, (एचआर) ओएनजीसी
शौर्य डोभाल       - डायरेक्टर, इंडिया फाउंडेशन
मनोज भार्गव       - बिजनेसमैन
नवीन बलूनी       - मुख्यमंत्री के सलाहकार
अद्वैता काला    - लेखक
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