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राहुल ने रावत को एक साल बाद दिया 'सर्टिफिकेट'

Wed, 05 Feb 2014 08:06 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के हाल सुधारने के लिए अब राज्य सरकार को एक साल का समय मिला है। यह अल्टीमेटम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का है।
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दिल्ली में सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत की राहुल से आपदा के बाद पुनर्निर्माण को लेकर बातचीत भी हुई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर निकले रावत ने आपदा कार्य की पॉलिटिकल हैंडलिंग भी शुरू की।

आचार संहिता के दायरे से बाहर
रावत ने न सिर्फ इंदिरा हृद्येश को बल्कि सलाहकार एवं पूर्व मंत्री नवप्रभात और स्थानीय विधायकों को भी साथ रखा। इस दौरे का एक फायदा यह भी हुआ कि अब सरकार इस बात की तैयारी भी कर रही है कि आपदा के कार्य को आचार संहिता के दायरे से बाहर रखे।
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रावत सोमवार को दिल्ली से कुछ देर से लौटे और सीधे ही आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए निकल पड़े। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दिल्ली से लौटने में देरी की वजह यह भी रही कि ऐन वक्त पर राहुल गांधी से मुलाकत का बुलावा आया।

एक साल बाद आकर देखेंगे
बताया जा रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने साफ कहा कि वे एक साल बाद आकर यह देखेंगे कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कितना काम हुआ। हाल ही में उत्तराखंड के आपदा प्रभावित राहुल गांधी से मिले थे और इस कारण भी राहुल भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों को लेकर संवेदनशील हैं। वैसे रावत पहले ही आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देने का इरादा जाहिर कर चुके हैं।

स्थानीय विधायकों को दौरे में रखा
आपदा प्रभावित दौरे में रावत ने अपने अनुभवी होने का पुख्ता प्रमाण भी दिया। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने घोषणाएं तो की हीं। साथ ही स्थानीय विधायकों को भी दौरे में साथ रखा।

वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के साथ ही आपदा सलाहकार एवं पूर्व मंत्री नवप्रभात, केदारनाथ विधायक शैलारानी रावत, थराली के विधायक जीतराम, कर्णप्रयाग के विधायक अनसूया प्रसाद मैखुरी आदि भी रावत के  साथ थे।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि निर्माण कार्य तुरंत ही शुरू होने चाहिए। जल्द ही मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजने को भी कहा गया। रावत के समाने लोगों ने पुल, पुलिया, संपर्क मार्ग आदि का निर्माण न होने की समस्या भी रखी।

"आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पर एक बात तो समझ में आई कि शासन स्तर पर काम-काज तो होता रहा पर क्षेत्र में मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना जरूरी है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों की समस्याओं का आकलन और निराकरण करने के लिए पहले प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी।

इस कमेटी की बैठकों को तुरंत शुरू किए जाने की बात भी हुई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के क्षेत्र में आने से लोगों को एक उम्मीद तो बंधी ही है। मैने भी बेहतर महसूस किया। इससे पहले में आपदा सलाहकार जरूर रहा पर कोई अधिकारी सुनने को तैयार ही नहीं होता था। अब क्षेत्र में आने का मौका मिला है तो स्थिति में फरक आना चाहिए।"
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-नवप्रभात, पूर्व मंत्री और आपदा सलाहकार
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