इनसे क्या सीखेंगे एमबीबीएस के छात्र
मेडिकल कॉलेज में इस बार हुई रैगिंग की घटना इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि इसमें पीजी के सीनियर डॉक्टरों ने जूनियर के साथ रैगिंग की है। इन डॉक्टरों के ऊपर एमबीबीएस के छात्रों को पढ़ाने और क्लीनिकल कार्यों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। आसान शब्दों में कहें तो ये कॉलेज में शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। अब जब शिक्षक ही रैगिंग की घटनाओं को अंजाम देंगे तो एमबीबीएस के छात्र इनसे क्या सीखेंगे। इससे व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठ रहा है।
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यह घटनाएं आ चुकी हैं सामने
1- वर्ष 2019 में जूनियर छात्रों ने उसके साथ हो रही रैगिंग के संबंध में शिकायत की थी। उसका आरोप था कि सीनियर उसे बेवजह परेशान कर रहे हैं। इस मामले में कॉलेज ने छह छात्रों पर कार्रवाई की।
2- वर्ष 2021 में एक जूनियर छात्र ने प्राचार्य को ई-मेल भेजकर शिकायत की कि सीनियर छात्र उसे गर्दन झुकाकर चलने की बात कहते हैं।
3- वर्ष 2023 में सीनियर छात्रों ने एक जूनियर की पिटाई कर दी थी। इस मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ छात्रों पर कार्रवाई हुई थी।
4- जनवरी 2026 में सीनियर छात्रों ने मिलकर जूनियर को बेल्ट और चप्पलों से पीटा था। और जबरन बाल कटवाने का भी आरोप लगा था। इस मामले में कॉलेज ने कई छात्रों पर कार्रवाई की थी।
5- अप्रैल 2026 में सीनियर छात्रों पर जूनियर छात्र की दाढ़ी और बाल कटवाने का दबाव बनाने का आरोप लगा था। इस मामले में कॉलेज ने कई छात्रों पर कार्रवाई की।