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यहां हैं पौने दो ग्राम से लेकर ढाई टन तक की कुरान, कभी नहीं देखी होगी आपने

Sun, 11 Jun 2017 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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तस्मिया ऑल इंडिया एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी की ओर से 2-ए टर्नर रोड पर शनिवार को कुरान लेख कला के दर्पण में 13वीं दो दिवसीय प्रदर्शनी शुरू हो गई। प्रदर्शनी का शुभारंभ पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय और सोसायटी के अध्यक्ष डा. एस फारूख ने किया। कई तरह के कुरान पाक को देखने को शाम तक हजारों लोग प्रदर्शनी में पहुंचे। 
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प्रदर्शनी में एक सफे (पेज) से लेकर 1286 सफे (पेज) तक का पवित्र कुरान, पौने दो ग्राम की कुरान से लेकर ढाई टन तक का कुरान, मुगल बादशाह औरगंजेब से लेकर इराक के बादशाह सद्दाम हुसैन सहित मलेशिया, कुवैत, ईरान, उमान, सूडान, लिबिया आदि मुल्कों के बादशाहों द्वारा लिखी गई और छपवाई गई कुरान, पीतल के पतरों पर लिखी कुरान, सौ साल से लेकर साढे़ सात सौ साल तक की कुरान है। जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। 

प्रदर्शनी पर आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत इजिप्ट से आए अल अजहर यूनिवर्सिटी के शेख कारी मोहम्मद समीर एवं शेख कारी मोहम्मद अब्दुल हाफिज ने पवित्र कुरान पाक की तिलावत से की। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि कुरान और इस्लाम शांति का संदेश देते हैं। हमारे मुल्क का इस्लाम दुनिया में नई रोशनी देता है। 
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1438 साल पहले नाजिल हुई थी कुरान पाक

कहा कि धरती पर धर्म अलहदा है, लेकिन ऊपर ईश्वर एक है। सभी धर्मों के लोगों को एक दूसरे की संस्कृति से रूबरू होना चाहिए। यदि हमारे मन साफ है तो कोई हमारे बीच मजहब की दीवार नहीं खड़ी कर सकता। 

आयोजक सोसायटी के ट्रस्टी डा. एस फारूख ने कहा कि पवित्र कुरान पाक 1438 साल पहले नाजिल हुई थी और आज भी उसी तरह है, जैसे तब थी। इसकी लिखावट आज कला में तब्दील हो गई है। आदमी का स्वभाव है कि वो कला को देखकर खुश होता है।

इसी कला के संग्रह के माध्यम से कुरान पाक का संदेश अन्य मजहबों के लोगों तक पहुंचाने को साल 2005 से प्रदर्शनी का आयोजन कर रहे हैं। बताया कि सालों पहले अपने वालिद की जीवनी लिखते समय कुरान को देखकर कुरान-ए-करीम का ऐसा शौक पैदा हुआ कि उन्होंने इसका एक पूरा संग्रह बना लिया। जिनकी हर साल प्रदर्शनी लगाते है। 
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सात साल के बच्चे ने हदीस सुना चौंकाया 

कार्यक्रम में शहर मुफ्ती सलीम अहमद, मुफ्ती रिसालुद्दीन हक्कानी, अनिल नौरिया, आर. के. बख्शी, ब्रिगेडियर के. जी. बहल, डा. आइ. पी. सक्सेना, रामकुमार वालिया, लालचंद शर्मा, आशा टम्टा, डा. आदित्य आर्य, डा. जोशी, डा. हिम्मत सिंह, मुफ्ती वसीउल्लाह, जहांगीर अहमद, मुफ्ती जियाउल हक, डा. सैय्यद फैसल, सैय्यद मोहम्मद यासर, सैय्यद हारून अहमद, हाफिज शाहनजर, मुनीर अहमद, हमजा, सैय्यद फारूख अहमद आदि मौजूद थे। 

ताबीज बनवाने को उमड़े लोग
दोनों हाथ न होने के बाद भी नायाब तरीके से कुरान की आयतें, दुआएं लिखने में माहिर मुफ्ती शान ए आलम से ताबीज बनवाने को पूरे दिन महिलाओं और बच्चों की भीड़ लगी रही। रोजा होने के बाद भी उन्होंने लोगों को निराश नहीं किया। पूरे दिन में सैकड़ों लोगों को ताबीज बनाकर दिए। तस्मिया अकादमी के मुफ्ती वसीउल्लाह ने बताया कि वे मूल रुप से अमरोहा के रहने वाले है। बचपन में एक हादसे में उन्होंने दोनों हाथ गंवा दिए थे। उन्होंने दारुल उलूम से मुफ्ती की तालीम हासिल की। अब वो सहारनपुर के गंगोह में बच्चों को तालीम दे रहे हैं।

सात साल के बच्चे ने हदीस सुना चौंकाया 
प्रदर्शनी में आयोजित कार्यक्रम में सात साल के बालक बिलाल ने बिना अटके चालीस हदीस सुना उनकी तर्जुमा भी बताया। सात साल के बच्चे से हदीस सुनकर सभी आश्चर्यचकित थे। सभी ने उसकी प्रतिभा की सराहना की। आयोजक डा. एस फारूख ने बच्चे को पुरस्कृत किया।
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