एम्स में प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं लचर
एम्स में प्रशासनिक व्यवस्थाएं लचर हैं। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एम्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि रेफर मरीजों को लगातार बेड का बहाना बनाकर लौटाया जा रहा है, तो यह संस्थान की प्रशासनिक असफलता है। आखिर एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था में गंभीर मरीजों के लिए आपात व्यवस्था क्यों नहीं है और यदि है, तो फिर रेफर मरीजों को दर-दर भटकने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला ने कहा कि इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। एम्स राज्य का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। यहां रेफर होकर आने वाले मरीजों को कम से कम प्राथमिक उपचार तो मिलना चाहिए। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी कि पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
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यह घटना बेहद दुखद है। एम्स वास्तविकता का आकलन अवश्य करेगा। एम्स में बेड की समस्या सतत रूप से बनी हुई है। एम्स में एक बेड के लिए तीन मरीज हमेशा रहते हैं। बेड की उपलब्धता के लिए राज्य और केंद्र सरकार दोनों के सहयोग की आवश्यकता है, जिससे 200 एकड़ भूमि प्राप्त होने के बाद एम्स का विस्तार किया जा सके। राज्य में प्राथमिक केंद्र व द्वितीयक केंद्रों की कमी के चलते भी एम्स में बेड की समस्या बनी रहती है।
- डॉ. संदीप कुमार, पीआरओ, एम्स