शातिर अमित उर्फ भूरा की फरारी के साथ दून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय रौतेला की कुर्सी भी बदल गई। अपर सचिव गृह पुष्पक ज्योति को अब जिले की कमान सौंपी गई है। रौतेला को उनके स्थान पर भेजा गया है। बेमौके पर हुए तबादले को लेकर तमाम के तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अपराधों को लेकर कई मोर्चे पर नाकामी के चलते शासन को मौके की तलाश थी। सोमवार को भूरा की फरारी की खबर आई तो कार्रवाई की तलवार चला दी गई।
संगीन अपराधों से जूझते रहे
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद हरीश रावत ने अपने पहले आदेश में देहरादून के एसएसपी केवल खुराना को स्थानांतरित किया था। खुराना के स्थान पर छह फरवरी को अजय रौतेला ने देहरादून के एसएसपी के रुप में कार्यभार संभाला था। वह अपने कार्यकाल के दौरान संगीन अपराधों से जूझते रहे। लूट, डकैती और चोरी की घटनाएं कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनती रही।
सरकार की किरकिरी
नकरौंदा कांड के बवाल ने तो सरकार तक को हिला दिया था। हालांकि उस समय भी कप्तान को हटाने की मांग उठी थी। सरकार तैयार भी हो गई थी, लेकिन संदेश गलत जाने के डर से कार्रवाई को टाल दिया गया था। इसके बाद लगातार हो रहे अपराधों से सरकार की किरकिरी हो रही थी। निचले स्तर पर पुलिस पर शिंकजा कमजोर होने को लेकर रौतेला की कप्तानी पर बीच-बीच में सवाल उठते रहे।
माना जा रहा था कि जनवरी माह में प्रमोशन के साथ ही रौतेला की विदाई होगी। सोमवार को रौतेला को हटाने के अप्रत्याशित फैसले से हर कोई अचरज है। कोई समझ नहीं पा रहा है कि यह क्यों और कैसे हो गया था। तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, इनमें भूरा की फरारी को बड़ी वजह बताया जा रहा हैं। उनके स्थान पर भेजे गए पुष्पक ज्योति 2001 बैंच के आईपीएस अधिकारी है। वह पहले दून के एसपी सिटी रह चुके हैं। अजय रौतेला के साथ पुष्पक ज्योति का भी प्रमोशन भी प्रस्तावित है।