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#Pulwama: देवभूमि के एक और बेटे का पार्थिव शरीर पहुंचा घर, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Sun, 17 Feb 2019 09:37 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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शहीद वीरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ा हुजूम - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद वीरेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार की सुबह उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर स्थित खटीमा पहुंचा। इस दौरान केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने  पार्थिव शरीर को कंधा दिया। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा रवाना हुई। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
 
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martyr virendra singh
वीरेंद्र का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही पूरा गांव शोक में डूब गया। हजारों की भीड़ श्रद्धांजलि देने पहुंची। काठगोदम सीआरपीएफ से 35 जवानों की बटालियन अंतिम सलामी देने गांव पहुंची। 'वीरेंद्र जिंदाबाद, वीरेंद्र अमर रहे' के नारे लगाए गए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा विधायक पुष्कर सिंह धामी, पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा जिलाधिकारी डॉ नीरज खैरवाल, एसएसपी बरिंदर सिंह, एसडीएम विजय नाथ शुक्ला सीओ कमला बेस्ट,  कोतवाल संजय पाठक आदि मौजूद रहे। 
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martyr virendra singh
शव के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। पिता दीवान सिंह और पत्नी रेनू बेसुध हैं। पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी वीरेंद्र सिंह (36) क्षेत्र के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी दीवान सिंह (80) के पांच बेटों और बेटियों में सबसे छोटे थे। उनकी माता सावित्री देवी का सात वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। बड़े भाई जयराम सिंह वर्ष 2017 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मझले भाई राजेंद्र सिंह खेती करते हैं। पिता दीवान सिंह वीरेंद्र के परिवार के साथ ही रहते थे। कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने दी श्रद्धांजलि।

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martyr virendra singh
वीरेंद्र सिंह वर्ष 2004 में रामपुर से सीआरपीएफ बटालियन 45 में भर्ती हुए। एक वर्ष पहले ही उनकी पोस्टिंग कश्मीर में हुई थी। वह बीती 23 जनवरी को छुट्टी पर घर आए थे और दो दिन पहले (12 फरवरी) ही ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। तब किसी को क्या पता था कि वीरेंद्र को सभी आखिरी बार देख रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने श्रद्धांजलि दी।
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martyr virendra singh
वीरेंद्र की शहादत की सूचना मिलते ही उनकी पत्नी रेनू (26), उनकी भाभियां और दोनों बहनें रित्छा और पुष्पा बेसुध हो गईं। वीरेंद्र के दो मासूम बच्चे बड़ी बेटी रोही (4) और ढाई वर्षीय पुत्र बयान सिंह हैं। बेटी रोही ब्राइट एकेडमी प्रतापपुर में कक्षा एक में पढ़ती है। 
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शहीद वीरेंद्र सिंह
शहीद के मासूम बच्चों रोही और बयान नहीं जानते कि उनके घर पर लोग क्यों एकत्र हुए हैं। मम्मी और बाबा के साथ सभी लोग रो क्यों रहे हैं। कुछ देर यूं ही गुमसुम रहने के बाद दोनों बच्चे भी मम्मी के साथ रोने लगे। घर आईं महिलाएं कई बार रोते हुए बच्चों को उठाकर बाहर ले गईं और शांत कराया। 
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