किसी के भी बच्चे को मार देते थे। उनके इस खून-खराबे की वजह से हमने कश्मीर छोड़ा था। अपनी मातृभूमि छोड़ने का दर्द जरूर था। लेकिन, इत्मिनान भी था कि अब वह सुरक्षित हैं। निकिता की शादी हुई। आज पति मेजर विभूति शहीद हो गए। जिस डर से तब घर छोड़ा था, आज उसी विपदा से पूरा परिवार गुजर रहा है।
यह कहते उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उन्होंने इस बात पर सख्त नाराजगी जताई कि आतंकी दो मरते हैं और हमारे जवान पांच शहीद होते हैं। कब तक चलेगा यह सब? उन्होंने सरकार से मांग की कि एक बार ही आतंक का इलाज करें। देश में आतंक फैलाने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।
नीतिकाकी मौसी गिरिजा अपने दामाद मेजर विभूति की शहादत के बाद से बेहद गुस्से में हैं। उन्होंने अब तक की सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कहा, इतने सालों में हमारे इतने बेटे शहीद हो गए, लेकिन सरकार ने क्या किया। हमें एक शहीद के बदले 100 आतंकियों की लाशें चाहिएं।