पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की कवायद शुरू हो गई है। उत्तराखंड शासन ने जिलाधिकारियों को नौकरी के आवेदनों पर प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं शहीद के आश्रितों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अलग से दी जाएगी। जिसमें 10 लाख की राशि सैनिक कल्याण विभाग की ओर से उत्तराखंड शहीद कोष अनुदान से दी जाएगी और 15 लाख की राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से देने का प्रावधान किया जा रहा है।
14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। जिसमें उत्तराखंड के दो जवान शहीद हो गए थे। इसमें उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ बनकोट निवासी शहीद मोहन लाल रतूड़ी और ऊधमसिंह नगर जनपद के खटीमा मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी शहीद वीरेंद्र सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने भी शहीदों के आश्रितों को 25 लाख की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। इस पर शासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शहीद मोहन लाल और वीरेंद्र सिंह के आश्रितों को नौकरी देने के लिए संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों को प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्मिक विभाग ने कुछ माह पहले ही सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास की नई नियमावली जारी की है। इसमें अर्द्धसैनिक बलों के शहीदों को भी सेना की तर्ज पर सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है। पहली बार अर्द्धसैनिक बलों के शहीदों के आश्रितों को भी सरकार नौकरी देगी।
पुलवामा हमले में शहीदों के आश्रितों को नौकरी देेने के लिए जिलाधिकारियों को प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया हैं। सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास के नियमों के अनुसार सैनिक कल्याण विभाग की ओर से शहीदों के आश्रितों को 10-10 लाख की राशि दी जाएगी। शेष राशि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से देने की प्रक्रिया चल रही है।
- प्रदीप रावत अपर सचिव, सैनिक कल्याण विभाग