नौ सितंबर को गणेश चतुर्थी के लिए देहरादून में गणेश प्रतिमाएं बननी शुरू हो गई हैं।
खास बात यह है कि इस बार लुग्दी की प्रतिमाएं अधिक बनाई जा रही हैं, जो पर्यावरण के लिए मुफीद है। कारण कि कागज का बना होने से यह आसानी से पानी में घुल जाता है।
गणेश चतुर्थी की तैयारियां शहर में जोर-शोर से चल रही हैं। नौ सितंबर को शहर भर में गणेश जी की प्रतिमाएं स्थापित होंगी।
प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पूजा अर्चना की जाएगी। कहीं पांच तो कहीं दस दिनों के लिए पंडाल सजाए जाएंगे। हर रोज भजन संध्या का दौर चलेगा।
इन सबके बीच इस बार पर्यावरण का खास ख्याल रखा जा रहा है। यही वजह है कि शहर में आयोजन कराने वाली समितियां जहां लुग्दी की प्रतिमाएं बनवा रही हैं, वहीं प्रतिमा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंग भी प्राकृतिक हैं।
इस बार समिति लुग्दी के गणेश जी बनवा रही है, जो कागज का होने की वजह से आसानी से पानी में घुल जाता है। इस बार प्रतिमा की ऊंचाई बढ़ाते हुए साढ़े छ: फीट की गई है, जिसे पूरी तरह से इकोफ्रेंडली बनाया जा रहा है।
- आजीव विजय, सिद्धि-विनायक सेवा समिति
दो सालों से ही धोलास गांव में गणेश उत्सव होने लगा है। ये उत्सव दस दिनों तक चलता है। इस दौरान स्थापित की जाने वाली गणेश जी की प्रतिमा इस बार लुग्दी की बनवाई जा रही है। साथ ही छोटे-छोटे गणेश जी मिट्टी या खड़िया के ही बनाए जाएंगे, जो आसानी से पानी में घुल सकेंगे।
- आचार्य विपिन जोशी, धोलेश्वर महादेव