विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायकों के बहिष्कार किए जाने से देहरादून को स्थायी राजधानी बनाए जाने और यमुना विकास प्राधिकरण गठित करने समेत दो दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा ही नहीं हो सकी। नियम -54 के तहत देहरादून के पछवादून क्षेत्र की नदियों में चुगान का कार्य रोके जाने से निर्माण सामग्रियों की कीमत बढ़ने, ऊर्जा आधारित विकास की संभावनाओं पर विचार करने को समिति गठित करने, कृषि भूमि का अनियंत्रित आवासीय प्रयोग रोकने के लिए कानून बनाए जाने की मांग की थी। लेकिन, हंगामे के चलते इन पर चर्चा ही नहीं हो सकी।
प्रदेश में आपदा निपटने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने, धार्मिक उद्देश्य से बनाए गए ट्रस्ट या फिर सोसाइटी द्वारा संचालित मठ, मंदिर और आश्रम को राज्य सरकार की ओर की बिजली, पानी, सीवरेज और गृहकर शुल्क समाप्त करने के मुद्दे पर चर्चा होनी थी।
जबकि नियम -105 के तहत राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को बैकलाग के पदों पर भर्ती करने, नगर निगमों नगर निकायों में अधिकारियों, मेयरों, पार्षदों को संयुक्त रूप से विशेष प्रशिक्षण देने, किसानों को गन्ना भुगतान दिलाने के लिए विधानसभा के सदस्यों की समिति करने, औद्योगिक संस्थानों में छोटे छोटे उद्योगों को लीज पर दी गई जमीनों को फ्री होल्ड में परिवर्तित करने, गंगा विकास प्राधिकरण की तर्ज पर यमुना प्राधिकरण गठित करने, प्रदेश में बंदरों की जनसंख्या को कम करने के लिए नीति बनाने के अलावा राज्य में स्थापित उद्योगधंधों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, के उद्देश्य से समिति गठित करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी।