जिला मुख्यालय से सटे पोखरी गांव के लिए वर्ष 2004 में सड़क स्वीकृत हुई थी। लोनिवि ने निम बैंड से पोखरी तक 800 मीटर सड़क का सर्वे किया और सड़क में आने वाली वन भूमि के हस्तांतरण की स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन पड़ोसी गांव के कुछ लोगों के विरोध और शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते आज तक सड़क नहीं बन पाई है।
कुछ पर्यावरण प्रेमियों द्वारा एनजीटी का दरवाजा खटखटाए जाने से सड़क का निर्माण अधर में लटक गया है। पोखरी के ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर बीते जनवरी से कलक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे हैं।
शनिवार को धरने के 250 दिन पूरे होने पर पूर्व सैनिक शूरवीर नेगी व एक महिला कलक्ट्रेट परिसर में बने ऑडिटोरियम के छज्जे पर रस्सी के सहारे चढ़ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इस दौरान अन्य महिलाएं भी छज्जे पर चढ़ने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन तभी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रोक दिया। इससे गुस्साई महिलाओं ने गले में रस्सी बांधकर मांग पूरी नहीं होने पर आत्महत्या की चेतावनी दी।
वहीं अन्य आंदोलनकारियों ने थालियां बजाकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने 24 महिलाओं और छह पुरुषों को 151 पुलिस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि गिरफ्तार आंदोलनकारियों को एसडीएम के समक्ष पेश कर छोड़ दिया गया है।
वहीं ग्रामीण बलवीर कैंतुरा, पूजा नेगी, सुशीला नेगी, सुधा कैंतुरा, केदारी देवी, लक्ष्मण सिंह नेगी, नत्थी सिंह, जमन राणा, निर्मला देवी आदि ग्रामीणों ने कहा है कि एक हफ्ते के भीतर मामले में सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।