उधर, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीर्थ पुरोहितों से बात हो गई है। इसके बाद ही उन्होंने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई।
महाराज ने यह भी कहा कि बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं लेकिन बातचीत तय प्रक्रिया के तहत ही होगी। तीर्थ पुरोहित प्रमाण के साथ अपनी बातों को शासन में सक्षम अधिकारी के सामने रखें।
पहले लोग डॉरमेंट (सुस्त) रहते हैं और फिर बाद में हल्ला मचाते हैं। रही बात चार धाम विकास बोर्ड की तो चार धाम विकास बोर्ड से श्राइन बोर्ड का अंब्रेला (विस्तार) बड़ा है। तीर्थ पुरोहितों से बातचीत का दरवाजा खुला है। - सतपाल महाराज, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री
लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक चीज है। लेकिन मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि पंडा समाज, पुरोहित और अन्य लोग जो चार धाम की सेवा करते हैं उनके सारे हित और हकहकूक संरक्षित रखे गए हैं। देश में सभी बड़े धार्मिक स्थलों में श्राइन बोर्ड हैं। जिस तरह से चारधाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, अनुमान है कि 2030 तक इनकी संख्या एक करोड़ तक हो जाएगी। हमें भविष्य में श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से व्यवस्थाओं, सुविधाओं को योजनाबद्ध करना है। - त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री