देहरादून चाय बागान की जगह स्मार्ट सिटी बसाने का विरोध बढ़ता जा रहा है। वामपंथी दलों और सामाजिक संगठनों के अलावा अन्य लोग भी श्रमिकों के पक्ष में जुड़ते जा रहे हैं।
रविवार को चाय बागान बचाने के लिए सैकड़ों सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और चाय बागान श्रमिक धरने पर बैठे। इस मौके पर किसी भी सूरत में चाय बागान बचाने के लिए हुंकार भरी गई। सभी ने एक स्वर में कहा कि चाय बागान को खत्म नहीं होने देंगे।
फैसला किया गया कि दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सीएम आवास का घेराव किया जाएगा। इसमें भारी संख्या में चाय बागान मजदूर और अन्य नागरिक समुदाय से लोग शामिल होंगे। इस मौके पर वक्ताओं ने मुख्यमंत्री हरीश रावत और भाजपा विधायक हरबंस कपूर पर गंभीर आरोप लगाए गए। धरने में विकासनगर गुडरिच चाय बागान से भी श्रमिक आए थे।
दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित धरने को संबोधित करते हुए रिटायर्ड आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगती ने कहा कि कानूनन चाय बागान का स्वरूप नहीं बदला जा सकता। सरकार चाय बागान के स्थान पर स्मार्ट सिटी नहीं बना सकती। अगर ऐसा किया गया तो चाय बागान मालिकों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि लैंडयूज परिवर्तन और सीलिंग अधिनियम चाय बागान को बचा लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धनपतियों के आगे बिक चुकी है। अधिग्रहण का रास्ता अख्तियार कर सरकार चाय बागान कंपनियों के साथ बड़ा खेल कर रही है। आरोप लगाया कि इस खेल में सीएम हरीश रावत और भाजपा नेता हरबंस कपूर शामिल हैं।
वामपंथी नेता समर भंडारी ने कहा कि चाय बागानों को बचाने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। किसी भी दशा में चाय बागानों की जगह स्मार्ट सिटी नहीं बनने देंगे। कर्मचारी नेता जगमोहन मेंदीरत्ता ने कहा कि चाय बागान बचाने, श्रमिकों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने, पर्यावरण बचाने और चाय सेक्टर को दोबारा पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
कहा कि भाजपा विधायक हरबंस कपूर का चाय बागान की जगह स्मार्ट सिटी बनाने का समर्थन करना शर्मनाक है। जिला चाय बागान मजदूर सभा की अध्यक्ष चित्रा गुप्ता ने कहा कि मजदूर भाजपा और कांग्रेस नेताओं की असलियत समझ चुके हैं। इनके खिलाफ महाअभियान चलाया जाएगा।
राज्य आंदोलनकारी एवं भाजपा नेता रविंद्र जुगरान और जनकवि अतुल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण एवं श्रमिक हितों के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाएगा। चाय बागान मजदूर पंचायत के अध्यक्ष एमसी पंत ने कहा कि कानूनी तौर पर चाय बागान कंपनियां व सरकार कमजोर हैं।
वामपंथी नेता जीत सिंह ने कहा कि सीएम आवास घेराव कार्यक्रम तक लगातार छोटे-बड़े अभियान चलाए जाएंगे। वामपंथी नेता अशोक कटारिया, लेखराज, वीरेंद्र भंडारी, राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि चाय बागान कायम रहेंगे।
ग्राम प्रधान सीमा देवी, ग्रामीण नेता छोटे लाल, बीएमएस नेता जीएस बिष्ट, ईश्वर पाल शर्मा, जगदीश कुकरेती ने कहा कि किसी भी हाल में चाय बागान बचाएंगे। पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह नेगी, जगदीश राणा, सुरेंद्र सिंह, आर श्रीवास्तव ने कहा कि चाय बागान हर हाल में बचेंगे।
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी वीरेंद्र दत्त, पंकज कुकरेती, पीसी थपलियाल ने कहा कि चाय बागानों को बचाने व श्रमिकों के हितों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी। श्रमिक नेता चंपा ने कहा कि अब आंदोलन खुद चाय बागान श्रमिक संभालेंगे। राजीव कोठारी, शिशिर त्यागी, एचएस रावत ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन अशोक शर्मा ने किया।
मैंने सीएम को नहीं दी सलाह : हरबंस कपूर
वरिष्ठ भाजपा विधायक हरबंस कपूर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत को कभी भी चाय बागान की जगह स्मार्ट सिटी बसाने की सलाह नहीं दी। मुख्यमंत्री का बयान तथ्यों से परे है। इस तरह के अनर्गल आरोप लगाना गलत है।
विधायक ने कहा कि यह अवश्य है कि शहरी विकास विभाग की स्मार्ट सिटी संबंधी बैठक में सुझाव दिया था कि चाय बागान का कुछ हिस्सा अधिग्रहित करने में हर्ज नहीं है। ऐसा करते समय श्रमिकों और ग्रामीणों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। वह इस पक्ष में हैं कि चाय बागान की जगह स्मार्ट सिटी बनाई जाए, लेकिन पूरा चाय बागान खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, रविंद्र जुगरान ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान हास्यास्पद है। भला यह सरकार इतनी लोकतांत्रिक कब से हो गई? इसका मतलब तो यह है कि सरकार भाजपाई चला रहे हैं?