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लड़की की शादी से पहले जानें प्रॉपर्टी किसके नाम?

Thu, 28 Nov 2013 12:46 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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आपकी प्रॉपर्टी परिवार के किस सदस्य के नाम है। शादी से पहले लड़के वालों से यह सवाल पूछना किसी भी बेटी या उसके पिता को बेहद अटपटा लगेगा। लेकिन, दून में सामने आए कुछ मामलों के बाद यह सवाल पूछना जरूरी हो गया है।
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महिला संरक्षण अधिकारी के पास ऐसे मामले पहुंचे हैं, जिनमें महिलाओं को यह कहकर पति ने बाहर का रास्ता दिखा दिया कि प्रॉपर्टी मां के नाम है और मां नहीं चाहती कि वह संग रहे।

दरअसल एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में रूलिंग दी थी और कुछ लोगों ने इस आदेश को महिलाओं के उत्पीड़न का जरिया बना लिया है।

ये हैं मामले
केस-1
बलबीर रोड निवासी प्रीत कौर की शादी 12 साल पहले हुई थी। अक्सर घर में किसी ना किसी वजह से झगड़े होते रहते थे। प्रीत ने बताया एक दिन पति ने कहा कि प्रॉपर्टी मां के नाम है, वो यहां नहीं रह सकती।
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महिला बेटी संग मायके में रह रही है और लोगों के घरों में खाना बनाकर गुजारा कर रही है। जबकि ससुराल वालों के पास दो-दो मकान हैं और एक मकान खाली पड़ा है, उस पर ताला लगा हुआ है।

केस-2
गढ़ी कैंट निवासी एक महिला के साथ भी ऐसा ही हुआ। शादी के बाद से ही पति के साथ झगड़े शुरू हो गए थे। पति अक्सर महिला को घर से निकालने की धमकी देता। आखिरकार उसे निकाल दिया गया।

महिला ने घर आना चाहा तो मां के नाम प्रॉपर्टी होने का हवाला दिया गया। फिलहाल वह किराए के कमरे में रह रही है।

महिला का कहना है कि कोर्ट में केस करने के बावजूद इस दिशा में कोई आदेश नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में महिलाएं करें तो क्या करें।

कोर्ट में चल रहे मामले
एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार यदि लड़के की मां प्रॉपर्टी की मालिक है तो यह उसकी इच्छा पर निर्भर है कि वह किसे घर में रखे और किसे नहीं।

ऐसे में महिलाओं ने जब कोर्ट में केस दायर किया तो वहां से भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। करीब दो सालों से इन महिलाओं के केस पर कोई निर्णय ही नहीं हो पाया है।

यह था फैसला
उच्चतम न्यायालय ने प्रथम बार वर्ष 2007 में एसआर बतरा बनाम तरुणा बतरा के प्रतिपादित सिद्धांत में साझा गृहस्थी को परिभाषित करते हुए यह उल्लेख किया है कि घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत पीड़ित पत्नी केवल उसके पति द्वारा अर्जित संपत्ति या किराए पर ली गई संपत्ति में ही साझा गृहस्थी का दावा कर सकती है। ना कि सास-ससुर की अर्जित संपत्ति एवं किराए पर ली गई में।
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-वरिष्ठ अधिवक्ता, बार काउंसिल सदस्य, एडवोकेट चंद्र शेखर तिवारी

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