पीसीएस अफसरों को बैकडेट से प्रमोशन देने के मामले में एक और खेल सामने आया है।
गुरुवार को अफसरों के प्रमोशन के मुद्दे पर मुख्य सचिव के यहां हुई बैठक में पता चला कि प्रमोशन की सूची में शामिल तमाम अधिकारियों को शिथिलीकरण का लाभ देने में भी गोलमाल किया गया है। नियमानुसार चार साल की सेवा शिथिल की जानी थी, लेकिन कुछ अधिकारियों को पांच वर्ष से भी ज्यादा का लाभ दिया गया। इस विवाद के चलते अफसरों का प्रमोशन होना मुश्किल है।
बीती दो अगस्त को प्रदेश में सेवारत तीस से ज्यादा पीसीएस अफसरों को वर्ष 2013 से 6600 से बढ़ाकर 7700 ग्रेड-पे पर प्रमोशन देने संबंधी आदेश जारी किया गया था। बैकडेट प्रमोशन के साथ ही उन्हें एरियर दिए जाने की बात भी थी। ऐसा तब हुआ, जब नोशनल को छोड़कर अन्य किसी प्रकार से बैकडेट में प्रमोशन देने की व्यवस्था ही नहीं है। इस मामले को अमर उजाला ने नौ अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया।
इसके अगले ही दिन मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रमोशन आदेश रोकने के अलावा इसके परीक्षण किए जाने के निर्देश दिए। कुल मिलाकर मामला खटाई में चला गया। गुरुवार को इसी मुद्दे पर मुख्य सचिव के साथ कार्मिक विभाग के अफसरों की बैठक हुई। बैठक में चर्चा के दौरान एक और तथ्य सामने आया कि पीसीएस अधिकारियों को प्रमोशन देने में शिथिलीकरण का लाभ भी गलत तरीके से दिया गया है।
6600 से 7700 ग्रेड पर प्रमोशन के लिए कुल बारह वर्ष की सेवा चाहिए। यदि इसमें अधिकतम शिथिलीकरण दिया जाता है तो यह आधी यानी छह वर्ष हो जाएगी।
इसमें दो वर्ष प्रोबेशन पीरियड को घटाने के बाद चार वर्ष की सेवा कुल सेवा से कम की जाएगी। लेकिन, 30 में से लगभग 10 अधिकारियों की पांच से साढ़े पांच वर्ष तक की सेवा शिथिलीकरण दिखाकर कम कर दी गई। नतीजा यह हुआ कि अधिकृत न होते हुए भी तमाम अफसर प्रमोशन की सूची में शामिल हो गए। यह स्थिति देख मुख्य सचिव ने इस प्रकार प्रोन्नति न दिए जाने की बात कहते हुए बैठक समाप्त कर दी।
अब बैकडेट से प्रमोशन बेहद मुश्किल
पहले से ही विवादित रही यह प्रमोशन प्रक्रिया अब शासन के गले की फांस बन गई है। दरअसल सीधे सेवा में आए पीसीएस और नायब तहसीलदार के पद से प्रमोट हुए पीसीएस अफसरों में ज्येष्ठता का विवाद चल रहा था, जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। इसी के चलते इन अफसरों का प्रमोशन तीन साल तक फंसा रहा।
ऐसे में दोनों पक्षों के बीच प्रोन्नति को लेकर सहमति बन गई। आला अधिकारियों को एक प्रत्यावेदन दिया गया। न्याय विभाग ने भी परीक्षण के बाद अपनी सकारात्मक रिपोर्ट दे दी। जोड़-जुगाड़ से बैकडेट में प्रमोशन भी करवा लिया गया। मगर शिथिलीकरण का गैरवाजिब लाभ देने संबंधी नए पेंच के फंसने पर दोनों पक्षों में सहमति बनने की सूरत नजर नहीं आ रही है।
ये हैं अफसरों के नाम
बंशीधर तिवारी, ललित मोहन, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, हरीश चंद्र कांडपाल, संजय कुमार, नवनीत पांडे, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, गिरधारी सिंह रावत, आलोक कुमार पांडेय, रुचि तिवारी, झरना कमठान, रवनीत चीमा, विनोद गिरी गोस्वामी, प्रशांत कुमार आर्य, आशीष कुमार भटगॉई, प्रकाश चंद्र, दीप्ति सिंह, भगवत किशोर मिश्र, हंसादत्त पांडे, उदय सिंह राणा, बंशी लाल राणा, नरेंद्र सिंह, हरक सिंह रावत, मनमोहन सिंह, प्रताप सिंह शाह, भरतलाल फिरमाल, भवान सिंह चलाल, चंद्र सिंह धर्मशक्तू, जीवन सिंह नगन्याल, प्रवेश चंद्र डंडरियाल।