देहरादून। पंजीकरण कराने से पहले से ही रेरा निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं की निगरानी शुरू कर देगा। इसके लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था करते हुए सभी विकास प्राधिकरणों की ई-मेल को रेरा ने एकीकृत किया है।
जैसे ही कोई प्रमोटर आवासीय परियोजना के लिए नक्शा आवेदन करेगा उसी वक्त रेरा को इसकी सूचना मिल जाएगी। इससे अपंजीकृत परियोजनाओं की भी निगरानी की जा सकेगी। ऐसे में कोई प्रमोटर बिना पंजीकरण आवासीय इकाई बेचने का प्रयास करेगा तब तत्काल उस पर कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा भी रेरा ने कुछ नई व्यवस्थाओं को हाल में शुरू किया है।
दरअसल, सभी आवासीय परियोजनाओं का रेरा में पंजीकरण अनिवार्य होता है। बावजूद इसके बहुत सी परियोजनाओं में बिना पंजीकरण ही आवासीय इकाइयों की बिक्री होती है। इनमें बाद में विवाद की स्थिति भी पैदा होती है।
विवाद होने पर रेरा में शिकायत के बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इन सबका हल निकालते हुए रेरा ने एक नई व्यवस्था को शुरू किया है। रेरा ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों की ई-मेल को अपने सिस्टम में एकीकृत किया है। ताकि, निर्माण शुरू होने से पहले ही रेरा को संबंधित परियोजना की जानकारी मिल सके। इसके बाद प्रमोटर्स खुद-ब-खुद पंजीकरण कराने के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने बताया कि रिजर्व फंड बनाने के नियम भी लागू कर दिए गए हैं। इसके तहत आवंटियों से प्राप्त होने वाली राशि का एक नियत अंश एक अलग खाते में रखा जाएगा। इस रकम को बिल्डर और प्रमोटर्स परियोजना पूरी होने के पांच साल बाद तक नहीं निकाल सकते हैं।
इस फंड का उपयोग ऐसी स्थिति में किया जाएगा जहां आवंटियों का रिफंड या विलंब ब्याज प्रमोटर से वसूली प्रमाणपत्र के माध्यम से प्राप्त नहीं हो सकेगा। यही नहीं यदि कोई कमी ठीक नहीं करता है तो इस राशि से ये कमियां भी ठीक की जाएंगी।