देहरादून। जालसाज ने एक इंजीनियर की मृत्यु के करीब एक साल बाद अपने नाम फर्जी दानपत्र बनवाकर करोड़ों की संपत्ति अपने नाम करा ली। इसके लिए उसने खुद को मृतक इंजीनियर का पोता दर्शाया था। जबकि, दोनों परिवारों का दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। हैरानी की बात है कि इस संपत्ति का दाखिल खारिज भी कर दिया गया। पीड़ित परिवार की ओर से दी गई शिकायत पर वसंत विहार पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
वसुंधरा, गाजियाबाद निवासी सचिन चंद्र ने अपनी मां बिमलेश कुमारी की ओर से दी शिकायत में बताया कि उनके पिता दिनेश चंद्र पेशे से सरकारी इंजीनियर थे। उन्हें इंजीनियर्स एन्क्लेव में एक प्लॉट आवंटित हुआ था। उन्होंने इस पर निर्माण आदि नहीं कराया था। दिनेश चंद्र के बच्चे विदेश में रहते हैं। उनका दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है। आरोप है कि पिता की मृत्यु के करीब एक वर्ष बाद सहारनपुर के रहने वाले सत्यम पुंडीर ने खुद को दिनेश चंद्र का पोता दर्शाते हुए इंजीनियर्स एन्क्लेव के प्लॉट नंबर 10 का दानपत्र बनवाकर इसे अपने नाम करा लिया। यही नहीं इसका दाखिल खारिज भी करवा लिया गया।
इसके बाद आरोपी ने जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि परिवार को इसकी जानकारी तब हुई जब स्थानीय आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना दी। आरोप है कि दानपत्र तैयार करने, पंजीकरण कराने और नामांतरण की पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज और प्रतिरूपण का सहारा लिया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर विरोध करने पर गनमैन ने परिवार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए जातिसूचक टिप्पणियां कीं। पुलिस से उप-पंजीयक कार्यालय और तहसील से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और अवैध निर्माण रुकवाने की मांग की गई है। बसंत बिहार थानाध्यक्ष शैंकी कुमार ने बताया कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।