उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सदस्य और पूर्व में एसएसजे परिसर में रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी हाल ही में अस्तित्व में आए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के पहले कुलपति बनाए गए हैं।
मंगलवार को शासन ने उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने से तीन वर्ष अथवा 65 साल की आयु पूरी होने (जो भी पहले हो) तक की गई है। नए विवि में कुलपति की नियुक्ति हो जाने के साथ ही अब विश्वविद्यालय में कामकाज शुरू हो जाएगा। बता दें कि अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में प्रो. भंडारी को कुलपति बनाने की संभावना जता दी थी।
मूल रूप से नैनी सैनी पिथौरागढ़ निवासी प्रो. एनएस भंडारी ने इंटर की शिक्षा मिशन इंटर कॉलेज पिथौरागढ़ से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ से की। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की और पीएचडी के दौरान ही 1988 में कुमाऊं विवि नैनीताल में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हो गए थे। पिछले करीब 29 साल से वह अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत हैं। करीब तीन साल पहले उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सदस्य बनने से पहले वह एसएसएजे परिसर में रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष पद पर कार्यरत थे।
एसएसजे परिसर में वह इग्नू स्टडी सेंटर के समन्वयक, उत्तराखंड सेंटर ऑन क्लाइमेट चेंज कुमाऊं विवि के कोऑर्डिनेटर, कुमाऊं विवि अकादमिक परिषद के सदस्य, सदस्य फैकल्टी बोर्ड सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। उनके निर्देशन में अब तक आठ छात्र पीएचडी कर चुके हैं जो सभी उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। चार छात्र वर्तमान में भी पीएचडी कर रहे हैं।
उन्हें 2011 में राष्ट्रीय विद्या सम्मान पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 42 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वह जल विज्ञान और पर्यावरण पर पांच पुस्तकें भी लिख चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रो. भंडारी 13 अथवा 14 अगस्त को अल्मोड़ा में कार्यभार ग्रहण करेंगे।