साहब, मुझे मेहनत करके खाना पसंद है। हमेशा मेहनत से जितना भी मिला, उतने में खुश रहा। लेकिन, आज पहली बार किसी दूसरे पर आश्रित होना पड़ रहा। क्या करूँ, चाहकर भी काम पर नही जा पा रहा हूँ। घर पर राशन खत्म है। बच्चे भूखे मर रहे हूं और चारा भी नहीं। कुछ ऐसी ही पीड़ा है टर्नर रोड निवासी 56 वर्षीय रोहतास की।
रोहतास ने कहा कि वह पेशे से मौची हैं। टर्नर रोड पर सड़क किनारे बैठते हैं। लेकिन, कोरोना वायरस के चलते उनका काम छीन गया है। वह रोजाना 200 से 300 रुपये कमाते थे। उसी से घर मे राशन लाते थे। आज राशन लाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह खुद तो अकेले रह सकते हैं। लेकिन, बच्चों को भूखे रहते देख बहुत तकलीफ होती है। उन्होंने सरकार से जरूरतमंद लोगों की मदद की मांग की।
मदद को आगे आये अरुण
अपने सपने संस्था के संस्थापक अरुण यादव इन जरूरतमंदों की मदद को आगे आए हैं। उन्होंने इन लोगों को अगले कुछ दिनों तक का राशन मुहैया कराने का जिम्मा उठाया है। अरुण ने कहा कि उनकी संस्था क्षेत्र में जरूरतमंद लोगों को राशन बांटने का काम कर रही है।