हरिद्वार जिला जेल के अस्पताल में गुरुवार को एक कैदी ने फांसी लगा ली। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उपचार शुरू होने के 15 मिनट बाद ही उसने दम तोड़ दिया।
जिला जेल में सजा काट रहा रमेश उर्फ राजेंद्र उर्फ राजू (26 वर्ष) पुत्र प्रताप सिंह बसंतपुर गांव फता भनौली अल्मोड़ा का निवासी था। वह जिला जेल अस्पताल में सहयोगी के तौर पर कार्य करता था। रोजाना की तरह गुरुवार की सुबह वह ब्रुश करने के लिए शौचालय में गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
तभी दूसरा कैदी रमन भी वहां पहुंचा। काफी देर तक जब रमेश बाहर नहीं आया। तब दूसरे कैदी ने अपने साथी आनंद को बुलाया। दरवाजा खटखटाने पर भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।
इसके बाद सूचना पर पहुंचे बंदी रक्षकों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो रमेश शौचालय के रोशनदान पर गमछे के फंदे से फांसी लगाकर झूल रहा था।
15 मिनट के उपचार के बाद कैदी की हुई मौत
आनन-फानन में उसे जेल के अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां करीब 15 मिनट के उपचार के बाद कैदी की मौत हो गई। जेलर एसके सुखीजा ने बताया कि 24 नवंबर 2013 को आरोपी को अल्मोड़ा जेल से हरिद्वार शिफ्ट किया गया था।
आरोपी को लूट के बाद हत्या कर देने के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। रेप एवं छेड़छाड़ के मामले में भी उसे दस वर्ष की सजा हुई थी। कैदी रमेश उर्फ राजू ने आत्महत्या क्यों कि, ये साफ नहीं हो सका है। जेलर के अनुसार उसका व्यवहार सभी के साथ सामान्य था।
जेल के इतिहास में ये दूसरी घटना
हरिद्वार जेल के इतिहास में ये दूसरी घटना है। वर्ष 1999 में रोशनाबाद में जिला जेल वजूद में आई थी। इससे पहले रुड़की जेल को ही जिला जेल का दर्जा मिला हुआ था। वर्ष 2001 में भी एक बंदी ने जेल के ही अस्पताल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
जेल में स्थायी चिकित्सक तक नहीं
हरिद्वार की जिला जेल में करीब एक हजार बंदी एवं कैदी हैं। इसके बावजूद यहां स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में एक संविदाकर्मी चिकित्सक कुछ ही घंटे के लिए रोजाना आते हैं। यदि वो छुट्टी पर हों, तब दो फार्मासिस्ट के भरोसे ही पूरा अस्पताल रहता है।
बीते वर्ष फरवरी माह में स्थायी चिकित्सक एके गर्ग रुड़की में अपनी मूल तैनाती पर चले गए थे। उन्होंने जेल में कई वर्ष तक अपनी सेवाएं दी थीं। उनके जाने के बाद चिकित्सक सुरेश अग्रवाल के तौर पर जेल को नया चिकित्सक मिला। वे भी संविदा पर थे, लिहाजा कुछ ही घंटे जेल में सेवाएं देते थे।
स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के कारण कुछ माह पूर्व उन्होंने भी जेल की सेवाएं छोड़ दी। अब मौजूदा समय में चिकित्सक केके गर्ग ही कुछ घंटों के लिए आते हैं।
इसके अलावा फार्मासिस्ट के तौर पर पीएस नेगी एवं संविदाकर्मी खुशपाल की तैनाती है, लेकिन एक हजार के आसपास कैदियों की जिम्मेदारी संभालना इनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। जेल प्रशासन ने कई बार स्थायी चिकित्सक के लिए शासन को पत्र लिखा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।